चंडीगढ़। नशा मुक्ति दवा नीति पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट सख्त हुआ है। नशा मुक्ति केंद्रों में दी जाने वाली दवा बुप्रेनोरफिन को लेकर कोर्ट में तीखी बहस हुई। अदालत ने राज्य सरकार से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। राज्य की ओर से दलील दी गई कि सरकार नीति की समीक्षा कर रही है। 10 से 14 दिनों में जवाब दाखिल कर दिया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मामला नशा मुक्ति केंद्रों में दी जाने वाली विशेष दवा से जुड़ा है। यह दवा ओपिऑइड पर निर्भर मरीजों के इलाज में उपयोग होती है।

पंजाब के सरकारी डि-एडिक्शन केंद्रों में अन्य राज्यों के मरीजों को दवा देने पर प्रतिबंध लगा है। अदालत ने पूछा कि क्या ऐसे केंद्रों को अस्पताल के समान माना जा सकता है। यदि हां तो क्या बाहरी मरीजों को उपचार से वंचित करना जायज है।

राज्य सरकार ने बताया कि यह दवा अत्यधिक संवेदनशील और लत लगाने वाली है। इसके दुरुपयोग की आशंका रहती है। पहले आधार आधारित सत्यापन में गड़बडय़िों के मामले सामने आए थे। इसके बाद अब बायोमेट्रिक और वेबकैम आधारित निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। बाहरी राज्यों के मरीज दवा लेकर वापस चले जाते हैं। इससे उनकी निगरानी और जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है।

वहीं याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि अब सरकारी केंद्रों में भी केवल पंजाब वासियों को ही दवा का दी जा रही है। यह पहले केवल निजी केंद्रों तक सीमित था। इसे मनमाना और भेदभावपूर्ण बताया। इससे जरूरतमंद मरीजों के उपचार पर असर पड़ेगा।