नैनीताल (उत्तराखंड)। फार्मासिस्ट के नियमितीकरण मामले पर हाईकोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। पूछा है कि कुंदन सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य मामले में दिए नियमितीकरण के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया?

बता दें कि संविदा पर तैनात फार्मासिस्टों दीपक व अन्य ने अपने नियमितीकरण और न्यूनतम वेतनमान के लिए विशेष अपील दायर की थी। इनका कहना है कि चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने नए पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया। इससे उनके भविष्य पर संकट आ गया है। इससे पहले एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। कहा था कि नियमितीकरण के लिए कोई स्पष्ट योजना या नियमावली पेश नहीं की गई है।

अपीलकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील दी कि कुंदन सिंह मामले में हाईकोर्ट की समन्वय पीठ ने 2018 में ही राज्य सरकार को उपनल कर्मियों को नियमित करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की एसएलपी को सुप्रीम कोर्ट भी खारिज कर चुका है। एकल न्यायाधीश ने इस महत्वपूर्ण कानूनी पहलू पर विचार नहीं किया। सामने आया कि सरकार ने अदालती आदेशों के अनुपालन के लिए सात सदस्यीय समिति बनाई। लेकिन उसकी सिफारिशें केवल न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते तक ही सीमित रहीं। कोर्ट ने पाया कि इसमें वेतन संबंधी प्रावधान हैं। लेकिन चरणबद्ध नियमितीकरण के बारे में कोई ठोस योजना नहीं है।