लखनऊ। केजीएमयू में 2.25 करोड़ का दवा घोटाला प्रकाश में आया है। चीफ फार्मासिस्ट व डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाने वाली है।
यह है मामला
किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के यूरोलाजी विभाग में महंगी दवाओं की फर्जी खपत दिखाई गई थी। इस तरह सरकारी धन के दुरुपयोग की बात सामने आई। इस मामले की जांच अब पूरी हो गई है। रिपोर्ट में कई चौकाने वाली बातें पता चली हैं। मृतक मरीजों के नाम पर भी महंगी दवाएं खरीदी जा रही थीं। जांच कमेटी को करीब सवा दो करोड़ रुपये की दवाओं की गड़बड़ी के साक्ष्य मिले हैं। इसमें चीफ फार्मासिस्ट समेत विभाग के एक डॉक्टर की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
कमेटी ने जांच रिपोर्ट कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद को सौंप दी है। केजीएमयू प्रशासन दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ बर्खास्तगी की भी तैयारी में है। जांच कमेटी की सूची में तीन ऐसे रोगियों के नाम हैं, जिनकी कुछ माह पहले मौत हो चुकी है। सात-आठ ऐसे रोगियों के नाम हैं, जिन्हें कैंसर कभी हुआ ही नहीं। उनके नाम पर कैंसर की दवाएं खरीदी जा रही थीं। दरअसल, असाध्य रोगियों की दवाओं की खपत आठ से 10 लाख रुपये प्रतिमाह थी। यह अब अचानक बढ़कर करीब 35 लाख रुपये हो गई। इस पर अधिकारियों को शक हुआ। उन्होंने मामले की गोपनीय जांच के लिए कमेटी गठित की। इसे सवा दो करोड़ रुपये से अधिक की धांधली के साक्ष्य मिले हैं।










