रांची (झारखंड)। फार्मासिस्ट के बगैर संचालित मेडिकल दुकानों पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट ने गांवों में बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपस्थिति के संचालित दवा दुकानों को गंभीरता से लिया है।
अदालत ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पूर्व में भी निर्देश के बावजूद हलफनामा दाखिल करने से बचते रहे हैं। इसलिए इस बार यह कार्य स्वयं उन्हें ही करना होगा। कोर्ट ने फार्मेसी कौंसिल समेत अन्य संबंधित को भी शपथपत्र दाखिल करने को कहा है।
कोर्ट ने सभी पक्षों को 17 अप्रैल तक शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई सात मई को होगी। अदालत ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा अत्यंत गंभीर है। इसमें फार्मेसी एक्ट, 1948 के प्रावधानों का उल्लंघन होने की बात सामने आई है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के दवा दुकानों का संचालन अवैध है। ग्रामीण इलाकों में बिना फार्मासिस्ट के दुकानें चल रही हैं।










