नई दिल्ली। रजिस्ट्रेशन रिन्यू नहीं करवाने पर फार्मासिस्टों का नाम कटेगा। यह प्रस्ताव फार्मास्यूटिकल उद्योग और रिटेल फार्मेसी बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने में कुछ दिक्कतें भी हैं। दवा की स्ट्रिप पर उसका का नाम, बैच नंबर आदि लिखी होती है। पत्ता काटने पर यह जानकारी दवा के हिस्से पर नहीं रहती। इससे दवा की सही जानकारी मिलने में समस्या हो सकती है। इसलिए सरकार इस पर भी नियम बनाने की तैयारी कर रही है।
मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि अगर कटा हुआ पत्ता बच जाता है। वह नहीं बिकता तो उन्हें नुकसान हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि दवा कंपनियां दवा के छोटे पैक तैयार करें। बची हुई दवा कंपनियां वापस ले लें। खुले में दवा बेचने पर आपत्ति नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्ट्रिप का आकार 50 गोलियों तक होने के बजाय अधिकतम 10 गोलियों का होना चाहिए। बेकार दवाओं की बर्बादी कम हो। अगर यह नियम लागू होता है, तो इससे मरीजों का खर्च कम होगा। दवा की बर्बादी भी कम होगी। इसे लागू करने से पहले पैकिंग, लेबल और सुरक्षा से जुड़े स्पष्ट नियम बनाने जरूरी हैं। एक अधिकारी ने बताया कि इस विषय पर एक उप-समिति बनाई गई है।










