जबलपुर (मध्य प्रदेश)। प्रतिबंधित दवा लिखने के आरोपी डॉक्टर को हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। आरोपी पर मिलावटी कफ सिरप से कई बच्चों की मौत के मामले में केस दर्ज किया गया था। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की बेंच ने कहा कि आरोपी बच्चों के डॉक्टर हैं। उन्होंने 4 साल से कम उम्र के बच्चों को एक निश्चित डोज़ वाला कंपाउंड लिखा। उस पर सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा था। इसके कारण कई मासूम बच्चों की मौत हो गई। इस कफ सिरप से बड़े पैमाने पर लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा।
बेंच ने फरवरी 2026 में डॉ. प्रवीण सोनी और कुछ फार्मासिस्टों को ज़मानत से इनकार किया। ये बच्चों को कोल्ड्रिफ़ कफ सिरप लिखने और बेचने के लिए जि़म्मेदार थे। इनके कारण 30 बच्चों की मौत हो गई थी। कोल्ड्रिफ़ कफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा खतरनाक रूप से थी। यह तय सीमा से कहीं अधिक थी। यह पदार्थ ज़हरीला माना जाता है। इससे विशेष रूप से बच्चों में किडनी फेलियर हो सकता है। इसलिए सरकार ने 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इस दवा को लेने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि मेडिकल कम्युनिटी को पहले से ही पता था कि बच्चों को किडनी की समस्या हो रही है। बेंच ने यह भी पाया कि मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, दवाओं का ये कॉम्बिनेशन छोटे बच्चों को नहीं देना चाहिए। इन बातों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने माना कि ज़मानत नहीं दी जा सकती। इसलिए बेंच ने ज़मानत की अर्ज़ी खारिज की।










