मुंबई। पतंजलि के आयुर्वेदिक उत्पादों पर रेड करने पर रोक लगा दी गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने पतंजलि और दिव्य फार्मेसी के उत्पादों पर एफडीए को रेउ के लिए रोका है। यह रोक भ्रामक इंडिकेशन लेबल के आरोपों के कारण अगले आदेश तक लगाई गई है।
पतंजलि और उसकी सहयोगी कंपनी दिव्या फ़ार्मेसी को बड़ी अंतरिम राहत मिली है। महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि उसका एफडीए कोर्ट के अगले आदेश तक उनके आयुर्वेदिक उत्पादों पर कोई रेड नहीं करेगा। इन उत्पादों पर कथित तौर पर भ्रामक इंडिकेशन लेबल लगे थे। इनमें कैंसर, डायबिटीज़ और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज का दावा किया गया था।
यह भरोसा कार्रवाई को चुनौती देने वाली दिव्या फ़ार्मेसी और पतंजलि की याचिकाओं पर दिया गया। राज्य सरकार ने पूरे राज्य में छापेमारी की थी। 73 लाख से ज़्यादा कीमत की कथित तौर पर गलत लेबल वाली आयुर्वेदिक दवाइयां ज़ब्त की थी। इनमें से दिव्या फ़ार्मेसी द्वारा बनाई और पतंजलि ब्रांड के तहत बेची जाने वाली दवाइयों की कीमत 51 लाख थी।
एफडीए ने इन प्रोडक्ट्स को गलत लेबलिंग वाला और आपत्तिजनक माना। इनके लेबल पर गंभीर बीमारियों के इलाज में फायदेमंद होने का दावा किया गया था। रेगुलेटर ने इस लेबलिंग को आपत्तिजनक विज्ञापन का एक रूप माना। कई आउटलेट्स से टैबलेट, फॉर्मूलेशन और दूसरे स्टॉक ज़ब्त किए गए।
बेंच ने राज्य के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया। संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह 25 जून, 2026 तक आयुर्वेदिक उत्पादों की इंडिकेशन-बेस्ड लेबलिंग पर अपना जवाब दाखिल करे। कोर्ट 2 जुलाइ को अंतरिम राहत की याचिका पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई करेगा।










