बलरामपुर (उत्तर प्रदेश)। खून के काले कारोबार का भंडाफोड़ हुआ है। तीन जिलों में इसका नेटवर्क फैला हुआ था। इसने सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो संविदाकर्मियों की गिरफ्तारी के बाद यह मामला सामने आया। सरकारी और निजी ब्लड सेंटर के बीच कथित मिलीभगत थी। इससे लंबे समय से खून का अवैध कारोबार चल रहा था। इसका विस्तार बलरामपुर, गोंडा और श्रावस्ती जिलों तक फैला हुआ है।

केके चैरिटेबल ब्लड सेंटर का संचालक अभिषेक संयुक्त जिला चिकित्सालय में कार्यरत था। ब्लड बैंक के लैब टेक्नीशियन की पत्नी भी इसी ट्रस्ट की सदस्य हैं। सरकारी ब्लड बैंक की डिग्री का इस्तेमाल किया गया। शिविरों में एकत्रित रक्त निजी ब्लड सेंटर तक पहुंचाया जाता था।

आरोपित अभिषेक के पिता जगदीश पूर्व में सीएमओ कार्यालय में थे। उन्होंने केके चैरिटेबल ट्रस्ट का गठन किया था। इस ट्रस्ट में दोनों परिवारों के सदस्यों को शामिल किया गया। सीएमओ कार्यालय से कुछ ही दूरी पर ब्लड सेंटर का संचालन शुरू हो गया।

सह-संचालक सौरभ श्रीवास्तव श्रावस्ती के संयुक्त जिला चिकित्सालय में तैनात हैं। वह तुलसीपुर में भी एक ब्लड सेंटर चला रहे थे। बाद में गोंडा में न्यू केके ब्लड सेंटर भी खोला गया। इससे तीन जिलों में एक संगठित नेटवर्क तैयार हो गया। खुलासा तब हुआ, जब एक लउक़ी इसी सेंटर से मिले रक्त के बाद मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। स्वास्थ्य विभाग के साथ औषधि प्रशासन भी सक्रिय हो गया। अब इस मामले की कई स्तरों पर जांच की जा रही है।

आरोपित मजदूर और कमजोर लोगों को रक्तदान के लिए तैयार करते थे। उन्हें मामूली रकम देकर रक्त लिया जाता । बाद में वही रक्त निजी अस्पतालों में 8 से 10 हजार रुपये तक में बेचा जाता था। समिति को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।