जयपुर (राजस्थान)। जेके लोन अस्पताल में करोड़ों के दवा घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। बच्चों को दी जाने वाली दवाओं के नाम पर गड़बड़ी सामने आई है। जो बच्चे एडमिट ही नहीं हुए, उनके नाम कच्ची पर्ची पर दवाएं दिखाई गईं। एडमिट बच्चों को 2 की जगह 7 से 13 एंटीबायोटिक, 6 की जगह 20 से 24 सीरिंज दिखाई गईं। कई दवाओं की दोगुना से 4 गुना तक सप्लाई दिखा दी गई। ड्रग कंट्रोलर द्वारा गठित टीम रिकॉर्ड जांचने में जुटी है। पिछले डेढ़ साल में 3 करोड़ तक की दवाओं की गड़बड़ियां की गई।
कागजों में बढ़ाई दवा खपत
1. अस्पताल में दवाइयों की कमी बताकर लोकल परचेज की गई।
2. जो दवाएं अस्पताल में नहीं थीं, उनकी खपत दोगुनी दिखाकर दिखा बिल उठाया है।
3. हर दिन दवा-कंज्यूमेबल के फर्जी बिल बनाए, जो सप्लाई ही नहीं की।
4.कच्ची पर्चियों पर दवा-कंज्यूमेबल सप्लाई कर दी। इमरजेंसी के पास काउंटर पर कच्चे पर्चे मिले। कम्प्यूटर में दवा सप्लाई दिखी। नियम मुताबिक अस्पताल के पर्चे पर दवा देनी होती है, डॉक्टर्स की सील-साइन जरूरी है।
5. फर्म विनायक, देवव्रत और के.के. एंटरप्राइजेज की ओर से सप्लाई की जाती है। जांच टीम केके एंटरप्राइजेज पहुंची और जांच की। दोनों जगह सप्लाई दवाओं में गड़बड़ी मिली है।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरएन सेहरा ने बताया कि ड्रग विभाग ने जांच की है। गड़बड़ी हुई है। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि हमने जांच कराकर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दे दी है। जांच अभी जारी है।










