जयपुर(कैलाश शर्मा) : राजस्थान फार्मेसी काउंसिल ने राज्य के सभी पंजीकृत फार्मासिस्टों और मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए एक कड़ा रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण सार्वजनिक सूचना जारी की है। काउंसिल को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ मेडिकल स्टोर मालिक मरीजों और ग्राहकों को लुभाने के लिए सोशल मीडिया और बड़े-बड़े होर्डिंग्स के जरिए दवाओं पर छूट (Discounts) और रियायतों का जमकर प्रचार कर रहे हैं। काउंसिल ने साफ कर दिया है कि ऐसा करना पूरी तरह से अनैतिक और गैरकानूनी है।
नियम तोड़ा तो रद्द होगा फार्मासिस्ट का लाइसेंस
काउंसिल के अनुसार, दवाओं पर छूट का ऐसा भ्रामक प्रचार फार्मेसी अधिनियम 1948 के तहत बने फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन 2015 के अध्याय 7 और 8 का सीधा उल्लंघन है। यदि कोई भी पंजीकृत फार्मासिस्ट इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसका फार्मेसी रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए रद्द या निलंबित किया जा सकता है। इसके साथ ही संबंधित मेडिकल स्टोर के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाएगी
छोटे दवा दुकानदारों को बचाने के लिए उठाया कदम
नोटिस में इस बात पर भी चिंता जताई गई है कि कुछ बड़े और आर्थिक रूप से मजबूत व्यवसायी इस तरह के विज्ञापनों का सहारा लेकर बाजार में अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Unhealthy Competition) पैदा कर रहे हैं। काउंसिल ने इसे प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 की धारा 4 का घोर उल्लंघन माना है, जो छोटे दवा दुकानदारों के व्यापार को भारी नुकसान पहुंचा रहा है और जनहित के खिलाफ है। इस मामले में प्रतिस्पर्धा आयोग भी दोषी व्यवसायियों पर भारी जुर्माना लगा सकता है
काउंसिल की सख्त चेतावनी
राजस्थान फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष महावीर कुमार सौगानी और रजिस्ट्रार सुनीता शर्मा ने संयुक्त रूप से कहा है कि काउंसिल की हालिया बैठक में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ गंभीर और सख्त कानूनी कार्रवाई करने का दृढ़ संकल्प लिया गया है। उन्होंने सभी फार्मासिस्टों और मेडिकल स्टोर संचालकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के अवैध प्रचार-प्रसार से दूर रहें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।










