पुणे: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने देश की प्रमुख दवा कंपनी सिप्ला पर बड़ी कार्रवाई की है। एफडीए ने पुणे के वाडकी स्थित सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के कैरीइंग एंड फॉरवर्डिंग (सीएंडएफ) वेयरहाउस का दवा बिक्री और वितरण लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई दवाओं की पैकेजिंग, भंडारण, स्टॉक प्रबंधन और दस्तावेजों में कथित खामियों के आधार पर की गई है।
बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद दोबारा हुई सुनवाई
पुणे डिवीजन-3 के सहायक आयुक्त (ड्रग्स) ने 1 अक्टूबर को लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी किया। इस मामले में एफडीए ने पहले 27 अगस्त को कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया और बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पूरे मामले की संशोधित प्रक्रिया के तहत नए सिरे से समीक्षा की गई।
पूरी प्रक्रिया इस प्रकार चली:
- 4 सितंबर: एफडीए ने सिप्ला को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया।
- 11 सितंबर: कंपनी ने नोटिस का लिखित जवाब दिया।
- 21 सितंबर: व्यक्तिगत सुनवाई में कंपनी ने अपना पक्ष रखा।
- 1 अक्टूबर: रिकॉर्ड और कानूनी प्रावधानों की जांच के बाद लाइसेंस रद्द करने का नया आदेश जारी हुआ।
एफडीए का कहना है कि यह फैसला दोबारा की गई पूरी जांच में सामने आए तथ्यों पर आधारित है, न कि केवल पिछली कार्रवाई को दोहराना।
रिएक्टिन प्लस की पैकेजिंग पर सबसे बड़ा सवाल
जांच में सबसे अहम मुद्दा शेड्यूल-एच की प्रिस्क्रिप्शन दवा ‘रिएक्टिन प्लस टैबलेट’ की पैकेजिंग रहा। एफडीए के मुताबिक, दवा के पैक पर इसे दर्द निवारक बताते हुए सिरदर्द, मांसपेशियों के दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, मोच, शरीर दर्द और दांत दर्द में राहत जैसे कई उपयोग लिखे गए थे। नियामक का आरोप है कि पैकेजिंग पर ऐसे दावे किए गए जिनकी अनुमति नहीं थी।
एफडीए ने पैक पर मानव आकृति और मांसपेशियों के दर्द में राहत दिखाने वाले चित्रों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। शेड्यूल-एच दवाएं केवल डॉक्टर के पर्चे पर बेची जा सकती हैं, और इनके प्रचार से जुड़े नियम काफी सख्त हैं।
भंडारण और रिकॉर्ड में भी खामियां
पैकेजिंग के अलावा वेयरहाउस में दवाओं के भंडारण, रिकॉर्ड रखने और एक्सपायर हो चुकी दवाओं के निपटान की प्रक्रिया में भी कई कथित कमियां पाई गई थीं। दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सही तापमान, साफ-सुथरा भंडारण और हर बैच का सटीक रिकॉर्ड जरूरी माना जाता है।
दवा उद्योग के लिए क्या संदेश
यह मामला दिखाता है कि राज्य दवा नियामक अब बड़ी कंपनियों के वितरण तंत्र पर भी कड़ी नजर रख रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की पैकेजिंग पर उपभोक्ता उत्पादों जैसे दावे मरीजों को खुद से दवा लेने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, जो सेहत के लिए जोखिम भरा है। इस आदेश के बाद कंपनी आगे क्या कानूनी कदम उठाती है, इस पर उद्योग की नजर रहेगी।
स्रोत: आईएएनएस, न्यूज नेशन के माध्यम से (2 अक्टूबर 2026)










