नई दिल्ली: देश में मेडिकल डिवाइस के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत वित्त वर्ष 2024-25 तक 266.64 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने यह जानकारी दी है।
27 आवेदन मंजूर, 14 एमएसएमई शामिल
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, मेडिकल डिवाइस पीएलआई योजना के तहत अब तक 27 आवेदनों को मंजूरी दी गई है। इनमें 14 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) शामिल हैं। यह इस बात का संकेत है कि योजना का फायदा केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे उद्योग भी उच्च तकनीक वाले उपकरण बनाने की दिशा में आगे आ रहे हैं।
1,153 करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश
स्वीकृत परियोजनाओं के तहत कंपनियों ने अब तक 1,153.07 करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश किया है। इस निवेश से देश में कई ऐसे अत्याधुनिक उपकरणों का निर्माण शुरू हुआ है, जिनके लिए भारत अब तक बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर था। इनमें शामिल हैं:
- एमआरआई और सीटी स्कैनर
- लिनियर एक्सेलेरेटर (लिनैक), जो कैंसर के रेडियोथेरेपी इलाज में इस्तेमाल होता है
- मैमोग्राफी सिस्टम
- सी-आर्म इमेजिंग मशीन
- अल्ट्रासाउंड उपकरण
हाई-एंड उपकरणों पर विशेष जोर
जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार ने मेडिकल डिवाइस के स्वदेशी निर्माण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। इनमें उच्च स्तरीय और अत्यधिक सटीक उपकरणों के निर्माण पर खास ध्यान दिया गया है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके। देश में बने महंगे इमेजिंग और कैंसर उपचार उपकरण आने से अस्पतालों की लागत घटने और मरीजों को सस्ता इलाज मिलने की उम्मीद है।
तीन मेडिकल डिवाइस पार्क बन रहे
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि फिलहाल देश में तीन मेडिकल डिवाइस पार्कों का विकास कार्य चल रहा है:
- नोएडा (उत्तर प्रदेश)
- उज्जैन (मध्य प्रदेश)
- कांचीपुरम (तमिलनाडु)
इन पार्कों में कंपनियों को साझा परीक्षण प्रयोगशालाएं और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उत्पादन लागत घटेगी और नई इकाइयां जल्दी शुरू हो सकेंगी।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता उद्योग
भारत का मेडिकल डिवाइस बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन लंबे समय तक हाई-एंड उपकरणों के लिए देश को विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ा है। पीएलआई योजना, डिवाइस पार्क और नियामक सुधारों के जरिए सरकार इस निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रही है। उद्योग जगत का मानना है कि अगर यह रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत मेडिकल डिवाइस निर्यात में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है।
स्रोत: खास खबर (15 सितंबर 2026)










