नई दिल्ली: भारत में मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनियों को जल्द ही मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस पहले से कम समय में मिल सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मेडिकल डिवाइस नियम, 2017 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए 23 जून 2026 को मसौदा अधिसूचना जी.एस.आर. 515(ई) जारी की गई है। इसका मकसद गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना लाइसेंस प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना है।

कितना घटेगा समय

  • क्लास बी डिवाइस (कम से मध्यम जोखिम): लाइसेंस का समय 140 दिन से घटकर 115 दिन
  • क्लास सी और डी डिवाइस (उच्च जोखिम): लाइसेंस का समय 105 दिन से घटकर 90 दिन

क्लास बी डिवाइस: हर चरण की समय-सीमा तय

हाइपोडर्मिक सुई, ब्लड प्रेशर मॉनिटर और पल्स ऑक्सीमीटर जैसे क्लास बी डिवाइस को राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण लाइसेंस देते हैं। प्रस्ताव के तहत प्रक्रिया के हर चरण के लिए तय समय-सीमा होगी:

  • आवेदन की जांच और नोटिफाइड बॉडी को सौंपना- 30 दिन में
  • नोटिफाइड बॉडी द्वारा ऑडिट- 30 दिन में
  • निरीक्षण के बाद ऑडिट रिपोर्ट और सिफारिश- 15 दिन में
  • निर्माता के जवाब के बाद कमियों के सुधार की जांच- 20 दिन में

क्लास सी और डी डिवाइस: केंद्रीय स्तर पर तेज समीक्षा

कार्डियक स्टेंट, ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट जैसे उच्च जोखिम वाले डिवाइस को सीडीएससीओ केंद्रीय स्तर पर लाइसेंस देता है। इनके लिए प्रस्ताव में एक निरीक्षण चरण को 60 से घटाकर 55 दिन करने, निरीक्षण में मिली कमियों की जांच के लिए 15 दिन की नई अवधि जोड़ने और दो समीक्षा चरणों को 45 दिन से घटाकर क्रमश: 30 और 20 दिन करने की बात है।

‘डेफिशिएंसी क्लॉक’ की नई व्यवस्था

प्रस्ताव की एक अहम बात ‘डेफिशिएंसी क्लॉक’ है। अगर समीक्षा के दौरान नियामक को आवेदन में कोई कमी मिलती है, तो मंजूरी की समय-सीमा वहीं रुक जाएगी। निर्माता के संतोषजनक सुधार जमा करने के बाद ही घड़ी दोबारा चलेगी। इससे नियामक और कंपनियों, दोनों के लिए प्रक्रिया ज्यादा स्पष्ट होगी।

क्लास ए डिवाइस पर खास असर नहीं

क्लास ए यानी सबसे कम जोखिम वाले डिवाइस पर इन बदलावों का खास असर नहीं होगा। गैर-स्टेराइल और गैर-मापक क्लास ए डिवाइस पहले से ही सीडीएससीओ के सुगम पोर्टल पर आसान पंजीकरण के जरिए बाजार में आ सकते हैं, जबकि स्टेराइल या मापक क्लास ए डिवाइस के लिए लाइसेंस जरूरी है।

उद्योग को क्या फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि तय समय-सीमा से कंपनियां अपने उत्पाद जल्दी बाजार में ला सकेंगी, उत्पादन की बेहतर योजना बना सकेंगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। यह कदम भारत को मेडिकल डिवाइस निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने और आयात पर निर्भरता घटाने की सरकार की कोशिशों का हिस्सा है। अंतिम नियम मसौदे पर मिली टिप्पणियों पर विचार के बाद अधिसूचित होंगे।

स्रोत: ऑपरॉन स्ट्रैटेजिस्ट (मसौदा अधिसूचना जी.एस.आर. 515(ई) पर आधारित)