जबलपुर: मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और वहां पढ़ रहे विद्यार्थियों के प्रशिक्षण को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि अगर कॉलेज तय मानकों को पूरा नहीं करते, तो वहां पढ़ रहे विद्यार्थियों के भविष्य का क्या होगा। कोर्ट ने संबंधित परिषद को 10 दिन के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।
मान्यता सिर्फ कागज पर नहीं, सुविधाओं की जांच भी जरूरी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता केवल कागजी दस्तावेजों के आधार पर नहीं दी जानी चाहिए। कॉलेजों में वास्तविक सुविधाओं जैसे प्रयोगशाला, शिक्षक, संबद्ध अस्पताल और बुनियादी ढांचे की जमीनी जांच भी जरूरी है।
नर्सिंग शिक्षा क्यों है अलग
नर्सिंग शिक्षा का स्वरूप अन्य सामान्य पाठ्यक्रमों से अलग है। विद्यार्थियों को कक्षा में सैद्धांतिक शिक्षा के साथ प्रयोगशाला में व्यावहारिक प्रशिक्षण और अस्पताल में मरीजों के साथ क्लिनिकल अनुभव की जरूरत होती है। बिना पर्याप्त व्यावहारिक प्रशिक्षण के तैयार हुई नर्सें अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा के लिए जोखिम बन सकती हैं।
विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रशिक्षण का प्रस्ताव
सुनवाई में एएनएम, जीएनएम, बीएससी, एमएससी और पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रमों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं और प्रशिक्षण की व्यवस्था का प्रस्ताव भी सामने रखा गया। हालांकि यह भी कहा गया कि विशेष प्रशिक्षण में केवल सैद्धांतिक विषयों को दोहराना पर्याप्त नहीं होगा। विद्यार्थियों को प्रयोगशाला और अस्पताल से जुड़े क्लिनिकल प्रशिक्षण की आवश्यकता भी पूरी करनी होगी।
पृष्ठभूमि: पहले भी उठ चुके हैं सवाल
मध्य प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता को लेकर कई विवाद सामने आ चुके हैं। कई कॉलेजों में मानकों की कमी पाए जाने के बाद हजारों विद्यार्थियों की परीक्षाएं और डिग्रियां प्रभावित हुई थीं। इसके बाद से नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने भी ऑनलाइन सेवाएं शुरू की हैं।
विद्यार्थी और अभिभावक रखें ध्यान
- किसी भी नर्सिंग कॉलेज में दाखिले से पहले उसकी राज्य नर्सिंग काउंसिल और भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) से मान्यता जांचें।
- कॉलेज का संबद्ध अस्पताल, प्रयोगशाला और फैकल्टी की जानकारी जरूर लें।
- केवल आधिकारिक काउंसलिंग के जरिए ही प्रवेश लें।
9 अक्टूबर की सुनवाई में मान्यता प्रक्रिया और विद्यार्थियों के प्रशिक्षण पर अहम फैसला आने की उम्मीद है।
स्रोत: पलपल इंडिया (26 सितंबर 2026)










