बेंगलुरु (कर्नाटक)। देश के अस्पताल अब साफ-सफाई, फैसिलिटी मैनेजमेंट, भोजन और मरीज सहायता सेवाओं पर पहले से कहीं ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इन्हें अब तक ‘नॉन-क्लिनिकल’ काम माना जाता था, लेकिन मरीज की सुरक्षा और जल्दी ठीक होने में इनकी सीधी भूमिका सामने आ रही है।
ब्लूस्प्रिंग के इंटीग्रेटेड फैसिलिटी मैनेजमेंट और फूड एंड हॉस्पिटैलिटी सर्विसेज के CEO नितिन त्रिखा ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमान का हवाला देते हुए बताया कि कम और मध्यम आय वाले देशों के अस्पतालों में हर 100 में से 15 मरीज भर्ती के दौरान कम से कम एक संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। प्रभावी संक्रमण नियंत्रण से इनमें से 70 प्रतिशत तक संक्रमण रोके जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ICU, ऑपरेशन थिएटर और वार्ड की सफाई आम हाउसकीपिंग जैसी नहीं हो सकती। हर जगह के जोखिम के हिसाब से प्रोटोकॉल, प्रशिक्षित स्टाफ और लगातार निगरानी जरूरी है। इसी तरह अस्पताल का भोजन भी अब इलाज का हिस्सा माना जा रहा है, जहां डॉक्टर द्वारा तय डाइट सही मरीज तक सुरक्षित पहुंचना जरूरी है।
NABH के हॉस्पिटल एक्रेडिटेशन मानकों के छठे संस्करण में भी हाउसकीपिंग, लॉन्ड्री, किचन की स्वच्छता और भोजन प्रबंधन को संक्रमण नियंत्रण से जोड़ा गया है। डिजिटल ऑडिट और IoT आधारित निगरानी से रखरखाव में मदद मिल रही है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत प्रक्रिया और प्रशिक्षित कर्मचारियों का कोई विकल्प नहीं है।
