मुंबई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब डायग्नोस्टिक्स, स्क्रीनिंग और बीमारी के जोखिम के आकलन में अहम भूमिका निभाने लगा है। NURA AI हेल्थ स्क्रीनिंग सेंटर के मेडिकल लीड डॉ. बिलाल थंगल का कहना है कि AI बीमारियों के जोखिम को जल्दी पहचानकर निवारक स्वास्थ्य सेवा (प्रिवेंटिव हेल्थकेयर) को बुनियादी रूप से मजबूत कर सकता है।
डॉ. थंगल के अनुसार AI का सबसे बड़ा उपयोग मेडिकल इमेजिंग में है। AI आधारित सिस्टम तस्वीरों का विश्लेषण कर असामान्यताओं की पहचान में मदद करते हैं, जिससे डॉक्टर उन हिस्सों पर ज्यादा ध्यान दे पाते हैं जिनकी गहराई से जांच जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी माना है कि AI इमेजिंग डेटा के जरिए असामान्यताओं की पहचान, मरीजों की प्राथमिकता तय करने और स्वास्थ्य तंत्र पर बोझ घटाने में मदद कर सकता है।
उन्होंने कहा कि AI कई स्वास्थ्य मानकों को एक साथ जोड़कर एक टेस्ट या लक्षण से आगे बढ़कर व्यक्ति की सेहत का पूरा आकलन करने में मदद करता है। इससे लोग बीमारी गंभीर होने से पहले डॉक्टर तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने साफ किया कि AI का मकसद डॉक्टरों की जगह लेना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर जानकारी देना है।
डॉ. थंगल ने जोर दिया कि AI अपनाने के साथ डेटा गोपनीयता, क्लिनिकल वैलिडेशन, पारदर्शिता और मानवीय निगरानी जैसे सुरक्षा उपाय भी जरूरी हैं। WHO की भारत के लिए हाल में आई AI स्वास्थ्य रणनीति में भी जिम्मेदार उपयोग और जनता के भरोसे पर जोर दिया गया है।
