इंदौर (मप्र)। दवा निर्यात फर्जी एनओसी से करने का मामला प्रकाश में आया है। दवा उद्योग फिर सवालों के घेरे में हैं। दवा निर्यात के लिए दूसरे देशों की फर्जी एनओसी का सहारा लिया जा रहा है। उज्जैन और इंदौर की तीन दवा कंपनियों की गड़बड़ी पकड़ में आई है। सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने ये मामला पकड़ा है। इसके बाद तीनों कंपनियों के निर्यात पर एक वर्ष के लिए बैन लगाया है।
इन कंपनियों पर की कार्रवाई
इस मामले को खामोशी से दबा दिया भी दिया गया। आरोप हैं कि कई कंपनियां ऐसी ही धांधली कर दवा निर्यात कर रही हैं। सेलवैल फार्मास्यूटिक्लस, दानिश हेल्थ केयर और सुपर फार्मूलेशंस के खिलाफ यह कार्रवाई की है। सेलवैल कंपनी इंदौर के सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है। जबकि दानिश हेल्थ केयर और सुपर फार्मूलेशंस दवा कंपनी उज्जैन में दवा निर्माण कर रही है।
इन तीनों कंपनियों ने सीडीएससीओ से दवा निर्यात की अनुमति मांगी थी। ये कंपनियां अफ्रीकी देश अंगोला में दवा की खेप भेजना चाह रही थी। सीडीएससीओ ने कंपनियों से दवा आयात कर रहे देश की एनओसी भी मांगी थी। इस पर कंपनियों ने अपने आवेदनों के साथ एनएओसी भी चस्पा की।
सीडीएसडीओ ने इन एनओसी की जांच करवाई। ये अफ्रीकी देश अंगोला के सरकारी विभाग के नाम से जारी थी। ये एनओसी जांच में फर्जी निकली। सीडीएससीओ ने तीनों कंपनियों की संबंधित दवा निर्यात पर एक साल के लिए पाबंदी लगा दी है।
ऐसे पकड़ा फर्जीवाड़ा
भारतीय दवाओं पर बीते वर्षों में तमाम सवाल उठे थे। कैमरुन में खांसी की दवा से बच्चों की मौत के मामले में भी इंदौर की दवा कंपनी का नाम सामने आया था। ऐसे मामलों के बाद केंद्र के औषधि नियामक ने निर्यात नियम कड़े कर दिए थे। बीते साल से नियम बना दिया गया कि निर्यात करने वाली कंपनी को उस देश की एनओसी पेश करनी होगी। इसी के बाद निर्यात की खेप भेजने की अनुमति जारी की जाएगी। नए नियमों के बाद निर्यात करने वाली कंपनियों ने अब अंगोला से जारी एनओसी लगाई तो सीडीएससीओ को शक हुआ।
एक ही देश की एनओसी का प्रारुप तीनों कंपनियों के रिकार्ड में अलग-अलग था। इसके बाद सीडीएससीओ के इंदौर दफ्तर ने दिल्ली को लिखा। एनओसी की जांच शुरू हुई। संबंधित देश से रिपोर्ट मिली की ये एनओसी फर्जी है।
निर्माता बोले, हम गलत नहीं
आरोपी दवा निर्माता अब कह रहे हैं कि गलती उनकी नहीं है। सेलवैल फार्मास्यूटिकल्स के संचालक कमल करमचंदानी ने कहा कि गलती हमारी नहीं है। हम तो वर्षों से ऐसे ही निर्यात कर रहे हैं। आयातक देश के एजेंट पर हमने भरोसा किया। उसने जो दस्तावेज दिए, वो लगाए थे। हमारी कंपनी का फॉर्मूलेशन वहां रजिस्टर्ड नहीं था। हमने तो फिर भी एक ही दवा की निर्यात अनुमति मांगी थी।
अन्य कंपनियों के तो कई तरह के फार्मूलेशन थे, जिन पर कार्रवाई हुई। वहीं, दानिश हेल्थकेयर के प्रमुख कासिम अली ने कहा कि हम इस मामले पर पत्राचार कर रहे हैं। उज्जैन के सुपर फॉर्मूलेशन के संचालक दिनेश जैन मामले पर चर्चा के लिए उपलब्ध नहीं हुए।





