नई दिल्ली। डॉक्टर्स और अस्पतालों के विज्ञापनों पर NMC ने सख्ती कर दी है। अब डाॅक्टर मरीजों को गुमराह नहीं कर सकेंगे। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने इस बारे में नई गाइडलाइंस जारी की है। यह गाइडलाइंसइस मेडिकल संस्थानों, अस्पतालों और रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के लिए है। इसके तहत डॉक्टर या अस्पताल खुद को सर्वश्रेष्ठ, नंबर 1 जैसे शब्दों के साथ प्रमोट नहीं कर सकते। जब तक ऐसे दावों को स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से सत्यापित करने की ठोस व्यवस्था न हो।
डॉक्टर्स सक्सेस स्टाेरी नहीं कर सकेंगे इस्तेमाल
आयोग ने स्पष्ट किया है कोई डॉक्टर की सफलता, इलाज के परिणाम या मरीजों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर भी पेश नहीं कर सकता। डॉक्टरों को अपने प्रचार के लिए मरीजों के प्रशंसा-पत्र या सफलता की कहानियांे का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। इलाज के परिणाम को सामान्य या निश्चित परिणाम के तौर पर पेश करना भी प्रतिबंधित है।
डॉक्टर्स अपनी सेवाओं को इस तरह प्रमोट नहीं कर सकते कि मरीजों को उनकी योग्यता, अनुभव या विशेषज्ञता के बारे में गलत धारणा बने। मरीजों की फोटो, वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड और क्लिनिकल इमेजेज के इस्तेमाल को लेकर भी सख्ती की है। इनका इस्तेमाल विज्ञापन के लिए तभी किया जा सकता है जब कानून के तहत इसकी अनुमति हो।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी नियम
नई गाइडलाइंस केवल पारंपरिक विज्ञापनों तक सीमित नहीं हैं। इनमें सोशल मीडिया, वेबसाइट, एआई से तैयार कंटेंट आदि माध्यम भी शामिल रहेंगे। आरएमपी या अस्पताल मरीजों को आकर्षित करने के लिए एआई कंटेंट का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
पेड रैंकिंग पर भी रोक
डॉक्टर या अस्पताल ऐसे भुगतान या व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन सकते, जिससे किसी डॉक्टर या संस्था की रैंकिंग को कृत्रिम तरीके से बढ़ाया जाए। इससे मरीजों को डॉक्टर की प्रोफेशनल प्रतिष्ठा के बारे में गलत धारणा बनती है। लाइव ब्रॉडकास्ट या कमर्शियल प्रचार के लिए सर्जरी या अन्य मेडिकल प्रक्रियाओं का प्रसारण भी नहीं कर सकेंगे।
NMC ने गाइडलाइंस के उल्लंघन पर ग्रेडड डिसिप्लिनरी एक्शन का प्रावधान किया है। उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर उल्लंघन के मामलों में रजिस्ट्रेशन के निलंबन या अन्य कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। दोहराए गए या गंभीर मामलों में कार्रवाई की अवधि बढ़ सकती है।





