देश में लगातार बढ़ रहे हैं रक्त कैंसर के मामले – राव

मैक्स ने घातक बीमारियों के विरूद्ध चलाया जागरूकता अभियान

बोन मैरो ट्रांसप्लांट है लंबे समय तक जीवित रहने का एकमात्र इलाज
भिवानी
अमेरिका व चीन जैसे विकसित देशों के बाद भारत में रक्त कैंसर के रोगियों वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है। भारत में वर्ष 2016 में रक्त कैंसर के 1.17 लाख नए मामले सामने आने की आशंका है।
यह जानकारी दिल्ली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शालीमार बाग में कैंसर विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं निदेशक डॉ.आर.रंगा राव तथा हीमैटोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट के सहायक कंसल्टेंट डॉ.गौरव दीक्षित ने अस्पताल द्वारा हरियाणा में घातक बीमारियों के विरूद्ध छेड़े गए जागरूकता अभियान के तहत यहां पत्रकारों से बातचीत में दी।
डॉ. रंगाराव ने कहा कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक शल्य रहित प्रक्रिया है, जिसमें क्षतिग्रस्त अथवा रोगग्रस्त बोन मैरो के स्थान पर स्वस्थ्य बोन मैरो स्टेम कोशिकाओं को प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। यह जटिल प्रक्रिया भारत के कुछ ही अस्पतालों में उपलब्ध है। हरियाणा में लगातार बढ़ रही विभिन्न प्रकार के कैंसर पर चर्चा करते हुए डॉ.राव ने कहा कि जीवनशैली में बदलाव के कारण हरियाणा में भी कैंसर लगातार अपने पांव पसार रहा है। जिसमें रक्त कैंसर भी मुख्य रूप से शामिल है।
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ.गौरव दीक्षित ने कहा कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट रक्त कैंसर के रोगियों में लंबे समय तक जीवित रहने के लिए एकमात्र इलाज है। क्योंकि इन रोगियों के कीमोथैरपी का कोई लाभ नहीं है। हालही में आई एक रिपोर्ट के आधार पर डॉ.दीक्षित ने बताया कि देश में इस समय थैलेसीमिया के करीब 67000 रोगी हैं। जिनमें हर साल 9 से 10 हजार नए मामले सामने आ रहे हैं। इस अवसर पर बोलते हुए मैक्स अस्पताल के उपाध्यक्ष डॉ.अमरदीप सिंह कोहली ने कहा कि अस्पताल द्वारा दी जा रही बीएमटी की सुविधा का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तथा हरियाणा के अन्य हिस्सों के रोगियों को लाभ मिलेगा।
 
भारत में बीएमटी प्रशिक्षित डाक्टरों की कमी
पत्रकारों से बातचीत में डॉ.रंगाराव ने कहा कि अमेरिका में इस समय 150 से 200 के करीब बीएमटी केंद्र हैं। दूसरी तरफ भारत की जनसंख्या अधिक होने के बावजूद बोन मैरो प्रत्यारोपण की सुविधा वाले कुछ ही अस्पताल हैं। देश में ज्यादातर मरीजों की मौत रक्त कैंसर की बजाए उपचार के अभाव में हो जाती है। इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि भारत की 125 करोड़ की आबादी पर 100 से भी कम ऐसे कैंसर विशेषज्ञ हैं जो इस समय बीएमटी प्रशिक्षित हैं।

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