नई दिल्ली। HIV रोकथाम की भारतीय जेनेरिक दवा को अमेरिकी मंजूरी िमली है। लेनाकापाविर नाम की यह दवा साल में केवल दो बार इंजेक्शन से दी जाती है। इस दवा की सालभर की खुराक की कीमत करीब 40 डॉलर रहने का अनुमान है।
भारत की डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज ने इसका जेनेरिक संस्करण विकसित किया है। इसमें यूनिटएड, क्लिंटन हेल्थ एक्सेस इनिशिएटिव और विट्स आरएचआइ का भी सहयोग है। इसे 120 निम्न और मध्यम आय वाले देशों में सस्ती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा। एफडीए की मंजूरी से इन देशों में दवा की नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है।
संक्रमण रोकने में असरदार
लेनाकापाविर एचआईवी (HIV ) से बचाव की प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (प्रेप) दवा है। इसे संक्रमण के जोखिम वाले लोग एचआईवी के संपर्क में आने से पहले लेते हैं। अधिक जोखिम वाले लोगों पर किए गए शोधों में इस इंजेक्शन से आशा जगी है। इससे नए संक्रमण लगभग खत्म होने जैसे नतीजे सामने आए थे। इसमें साल में केवल दो बार खुराक लेने की सुविधा है। इससे रोजाना गोली लेने में होने वाली परेशानी भी कम हो सकती है।
नियमित रूप से रोजाना दवा लेना कई लोगों के लिए मुश्किल होता है। ऐसे में लंबे अंतराल पर दिया जाने वाला इंजेक्शन संक्रमण से बचाव करता है।
मूल दवा अब भी महंगी

लेनाकापाविर की मूल दवा येजटुगो को पिछले साल अमेरिका में मंजूरी मिली थी। इसे गिलियड साइंसेज ने विकसित किया है। अमेरिका में इसकी सूची कीमत सालाना 28,218 डॉलर है। पेटेंट सुरक्षा के कारण भारत में बने जेनेरिक संस्करण को अमेरिकी बाजार में बेचा नहीं जा सकता।
एफडीए ने इसे दूसरे देशों में अमेरिकी सरकार के HIV एचआईवी कार्यक्रमों के तहत इस्तेमाल के लिए अस्थायी मंजूरी दी है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2025 में दुनिया में करीब 4.1 करोड़ लोग एचआईवी पीड़ित थे। इससे जुड़े कारणों से लगभग 5.7 लाख लोगों की मौत हुई।





