लखनऊ। कोडीन सिरप के बाद युवाओं में ‘नीले कैप्सूल’ का चलन बढ़ने लगा है। हाल ही में 5 लाख रुपये के नीले कैप्सूल जब्त किए गए हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल दर्द, नसों की बीमारी या मिर्गी के इलाज के लिए होता है। अब इन्हें नशे के लिए बेचा जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से स्पाजमो प्रॉक्सीवान, प्रिगाबालिन, गैबापेंटिन और ट्रामाडोल शामिल हैं।
दवा कारोबारियों ने बताया कि स्पाजमो प्रॉक्सीवान बाजार से लगभग गायब हो चुका था। कुछ समय से इसकी सप्लाई फिर शुरू होने की चर्चा है। यह दवा प्रतिबंधित है तो इसकी सप्लाई कौन कर रहा है?
स्पाजमो प्रॉक्सीवान जैसी दवाओं का दुरुपयोग बढ़ गया है। अब अधिकांश डॉक्टर इसे मरीजों को लिखना ही बंद कर चुके हैं। एफएसडीए अधिकारी बृजेश कुमार यादव नके अनुसार 15 दिनों में हुई छापेमारी के दौरान 5 लाख के नशीले कैप्सूल बरामद किए हैं। यह कैप्सूल केवल फुटकर और लखनऊ के बाहर से लाकर बेचे जा रहे थे। विभाग केवल दवा जब्त करने तक सीमित नहीं है। पूरे सप्लाई नेटवर्क और रैकेट की जांच की जा रही है। जल्द ही इस मामले में और कार्रवाई हो सकती है।










