हैदराबाद। नकली रेट्राटाइड बेचने वाली छह कंपनियों पर केस दायर किए हैं। फार्मा एली लिली की वेट लॉस वाली दवा रेट्राटाइड को अभी एफडीए से मंजूरी नहीं मिली है। इंजेक्शन के जरिए दी जाने वाली इस दवा के लिए कालाबाजारी होने लगी है। इसके जवाब में, लिली ने यूएसए की छह कंपनियों के खिलाफ केस दायर किए हैं। इन पर रेट्राटाइड के अवैध संस्करण बेचने का आरोप है।

ये मुकदमे उन फार्मेसियों, मेडिकल स्पा और ऑनलाइन विक्रेताओं को निशाना बना रहे हैं। ये नकली दवाओं को मानव उपयोग के लिए बेच रहे हैं। लिली ने कहा कि उसने अवैध बाजार में शामिल 200 से अधिक संस्थाओं की सूचना एफडीए को दी है। 100 से अधिक देशों में 14,000 से अधिक वेबसाइटों और उत्पाद सूचियों का पता लगाया है। ये रेट्राटाइड दवा की पेशकश कर रहे हैं।

एफडीए ने कहा कि नकली उत्पादों पर भले ही मानव उपभोग के लिए नहीं का लेबल लगा हो। लेकिन उन्हें खुराक संबंधी निर्देशों के साथ सीधे उपभोक्ताओं को बेचा जा रहा है। इन उत्पादों की गुणवत्ता अज्ञात है। ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।