मुंबई। सिप्ला फार्मा के पुणे स्थित कैरी एंड फॉरवर्डिंग यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया है। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने यह कार्रवाई की। यह कार्रवाई दवाओं की पैकेजिंग, भंडारण आदि में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर की गई। पुणे जिले के वाडकी स्थित कंपनी के मुख्य गोदाम का निरीक्षण किया गया था।

गोदाम में ये मिली गड़बड़ी

जांच के दौरान एफडीए को कई दवाएं सीधे फर्श पर रखी मिलीं। दवाओं के लिए पर्याप्त पैलेट और रैक की व्यवस्था नहीं थी। कंपनी के कंप्यूटर में दर्ज स्टॉक और गोदाम में वास्तविक स्टॉक के बीच भी अंतर मिला। खरीद और बिक्री के रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी पाई गई। एक्सपायर्ड दवाओं को संभालने से जुड़े रिकॉर्ड और तय प्रक्रिया में भी कमियां मिली। निरीक्षण में अधिकारियों को रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग पर ऐसा दावा मिला। इसे अनधिकृत बताया गया। यह शेड्यूल एच की प्रिस्क्रिप्शन दवा है। पैकेजिंग पर इसे ‘दर्द निवारक और बुखार कम करने वाली’ दवा बताया गया था। एफडीए ने इस दावे को दवा से जुड़े नियमों के खिलाफ माना। करीब 11.19 लाख रुपये का स्टॉक जब्त किया।

एफडीए ने कंपनी को गलत दावे वाली रिएक्टिन प्लस टैबलेट को बाजार से वापस मंगाने का निर्देश दिया। इस निर्देश और जरूरी कार्रवाई का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। बाद की जांच में भी दवा वापस मंगाने के निर्देशों का पालन नहीं हुआ। भंडारण व्यवस्था और स्टॉक रिकॉर्ड में भी कमियां पाई गईं।

विभाग ने लाइसेंस धारक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। कंपनी के जवाब के बाद रिएक्टिन प्लस टैबलेट वापस नहीं मंगाई गई। इसके बाद दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया गया। औषधि प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर चार खाद्य कारोबारों के लाइसेंस या पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं।