प्रयागराज (उप्र)। CMO अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं कर सकते। यह महत्वपूर्ण फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया है। जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने खुशी हास्पिटल मामले में सीएमओ द्वारा पारित सीलिंग और रजिस्ट्रेशन रद्द आदेशों को अवैध करार दिया है।

खुशी हास्पिटल और राजू कुमार ने सीएमओ के सीलिंग और रजिस्ट्रेशन रद्द आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि रजिस्ट्रेशन रद्द करने की शक्ति सिर्फ जिला पंजीकरण प्राधिकरण को है। सीएमओ को यह अधिकार नहीं है। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि 30 बिस्तर तक के अस्पतालों के लिए सीएमओ को सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है। लेकिन खंडपीठ ने इस दलील को ठुकरा दिया।

कोर्ट ने कहा कि शासनादेश से कानून में दी गई वैधानिक शक्तियों का विस्तार नहीं किया जा सकता। गठित प्राधिकरण के अलावा कोई अन्य अधिकारी रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं कर सकता। रजिस्ट्रेशन निरस्त करने से पहले अस्पताल को तीन महीने का नोटिस देना अनिवार्य है। साथ ही इसे बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए सील नहीं किया जा सकता। प्राधिकरण ने पंजीकरण रद्द करने के लिए कोई नोटिस जारी नहीं किया है। कोर्ट ने प्रतिवादी को निर्देश दिया है कि वह रजिस्ट्रेशन रद्द करने के लिए बाकायदा नोटिस जारी करे।