नई दिल्ली। जेनेरिक मेडिसिन का रुपये की गिरावट से निर्यात बढ़ेगा। भारत हर साल 30 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की दवा निर्यात करता है। देश जेनेरिक दवाओं का शीर्ष आपूर्तिकर्ता भी है। हालांकि फॉर्मूलेशन बनाने के लिए भारत अपनी बल्क ड्रग या एपीआई का 60-70 प्रतिशत आयात भी करता है।
आंकड़ों से पता चलता है कि सन फार्मा, डॉ रेड्डीज और जाइडस जैसी कंपनियों को उनके फायदे का बड़ा हिस्सा निर्यात से मिला है। बताया जा रहा है कि कि रुपये में 5 प्रतिशत गिरावट के कारण प्रमुख निर्यातकों को 7 से 8 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है। हालांकि बढ़ते इनपुट लागत के कारण निर्यात से होने वाला लाभ बेअसर हो जाएगा। भारत हर साल करीब 10 अरब डॉलर के एपीआई का आयात करता है। इस पर मुद्रा अवमूल्यन का असर पड़ेगा।
एक फॉर्मा एसोसिएशन के प्रमुख ने कहा, ‘ विनियमित बाजारों में निर्यात के मामले में ज्यादातर कंपनियां अपने एपीआई का उत्पादन करती हैं। इसके बावजूद कुछ केमिकल इंटरमीडिएटरीज का आयात होता है। बहरहाल भारत की दवा फर्में सस्ते और कॉमन एपीआई का आयात करती हैं।










