लखनऊ। नशीली दवा के नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। ट्रांसपोर्ट नगर में नशीली दवा डिलीवरी से पहले ही पकड़ी गई। एएनटीएफ और एफएसडीए ने नेटवर्क का खुलासा किया है। मौके से 9.60 लाख एल्जोमैक-0.5 टैबलेट जब्त की।
स्पैसमोनाम प्लस कैप्सूल, ओनेरेक्स सिरप की 720 बोतलें बरामद की हैं। बरामद दवाओं का कुल वजन करीब 228 किलो है। मौके से सात मोबाइल फोन और 11140 रुपए भी मिले। मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
कार्टन को बोरियों में छिपाकर रख रहे थे दवाएं
सूचना मिली थी कि ट्रांसपोर्ट नगर में नशीली दवाओं की खेप पहुंचने वाली है। टीम ने एस-363/364 के सामने निगरानी शुरू की। तीन लोग कार्टनों को बोरियों में छिपाते दिखाई दिए। तलाशी लेने पर किशन वासवानी, समीर अहमद और शाद इरशाद से नशीली दवाएं बरामद हुईं। तीनों प्रकार की दवाओं के नमूने जांच के लिए लिए।
ये दवाएं कन्हैया फार्मा के संचालक उमेश कुमार से ली गई थीं। टीम ने उमेश और सतेन्द्र सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया। उमेश सतेन्द्र सिंह की फर्म के दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था। इसके बदले सतेन्द्र को कमीशन दिया जाता था।
जांच में कन्हैया फार्मा में सात प्रकार की दवाओं का भंडारण मिला। फर्म संचालक दवाओं की खरीद-बिक्री से जुड़े अभिलेख नहीं दिखा सका। इसके बाद कन्हैया फार्मा को सील कर दिया गया।
शाद इरशाद से पूछताछ के बाद विशाल चौरसिया का नाम सामने आया। इसके बाद टीम ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। विशाल ने शाद को नशीली दवाएं उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की। कोडीन के एक मामले में उसका दवा लाइसेंस निरस्त हो चुका है। वह दूसरी फर्मों के माध्यम से नशीली दवाओं का कारोबार कर रहा था। बरामद सिरप उसने बृजेश वर्मा से खरीदने की बात भी बताई है। सभी छह आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।










