झज्जर (हरियाणा)। डोनेट ब्लड बेचकर 19 लाख का गबन करने का मामला सामने आया है। सिविल अस्पताल में लेखाकार ने ही यह घोटाला किया है। उसने निजी अस्पतालों से मिलने वाली राशि को अपने खाते में जमा करा लिया। उस पर 19.14 लाख 800 रुपये के गबन का आरोप है। विभाग ने जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है।
यह है मामला
निजी अस्पतालों में मरीजों को सरकारी ब्लड बैंक से रक्त दिलाने के बदले शुल्क लिया जाता है। यह राशि सरकारी खाते में जमा की जानी थी। लेखाकार अखिल ने एकत्रित राशि का बड़ा हिस्सा बैंक में जमा नहीं कराया।
वर्ष 2023-24 में 10 लाख 15 हजार 200 रुपये जमा नहीं कराए गए। वर्ष 2024-25 में 4 लाख 97 हजार 100 की राशि गायब मिली।
2025-26 में 5.90 लाख 600 रुपये में से केवल 1 लाख 88 हजार 100 रुपये जमा किए। शेष राशि बैंक खाते में नहीं पहुंची। एक अन्य खाते की भी जांच जारी है। अखिल हटाए जाने के बाद भी मार्च 2026 तक राशि संग्रह का कार्य करता रहा। मार्च 2026 में वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग के दौरान जांच में अनियमितताएं सामने आईं।
इसके बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई। जांच समिति ने संबंधित बैंक खातों की स्टेटमेंट और रसीद पुस्तकों का मिलान किया। इसमें राशि जमा करने और प्राप्त राशि के बीच अंतर मिला। संदेह होने पर पिछले वर्षों के रिकॉर्ड भी खंगाले गए। तीन वर्षों में करीब 19 लाख रुपये से अधिक के गबन का खुलासा हुआ। आरोपी अखिल को वित्तीय रिकॉर्ड और कैशबुक प्रस्तुत नहीं किए। फिलहाल मामले की जांच जारी है।










