लखनऊ (यूपी)। नकली लिपाग्लिन दवा के कारोबार में दो के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। काउंटरफीट औषधि लिपाग्लिन टैबलेट, बैच नंबर आईबी00327ए के फर्जी बिलिंग मामले में औषधि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सर्वेश सिंह उर्फ मुन्ना भाई तथा फर्म मेसर्स क्योरहेल्थ मेडिकोज के संचालक दुर्गेश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

ये है मामला

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की जांच में मामला आया। पता चला कि काउंटरफीट लिपाग्लिन की 9,610 स्ट्रिप मेसर्स क्योरहेल्थ मेडिकोस द्वारा गुजरात की दो फर्मों को बेची गईं। अभिलेखों में इन दवाओं की खरीद लखनऊ स्थित मेसर्स बालाजी फार्मास्युटिकल्स से 11,360 स्ट्रिप दर्शाई गई थी।

मेसर्स क्योरहेल्थ मेडिकोज के लाइसेंस प्राप्त परिसर में दवाओं का कोई भंडारण नहीं मिला। परिसर किसी अन्य व्यवसाय को किराए पर दिया गया था। वहीं, लखनऊ में मेसर्स बालाजी फार्मास्युटिकल्स के नाम से जारी औषधि लाइसेंस पहले ही निरस्त किया जा चुका था। फर्म का जीएसटी पंजीकरण भी रद्द हो चुका था। मेसर्स बालाजी फार्मास्युटिकल्स के पूर्व संचालक ने इन दवाओं की बिक्री से इनकार किया। दूसरी ओर, मेसर्स क्योरहेल्थ मेडिकोस के संचालक दुर्गेश कुमार ने बताया कि उसे दवाओं की आपूर्ति ‘मुन्ना भाई’ के माध्यम से हुई थी। जांच में इस्तेमाल मोबाइल नंबरों का संबंध सर्वेश सिंह और अन्य व्यक्तियों से सामने आया।

इसी लिपाग्लिन बैच के संबंध में महाराष्ट्र में भी सर्वेश उर्फ मुन्ना सिंह समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज है। निरस्त लाइसेंस के नाम का कथित रूप से इस्तेमाल किया गया। फर्जी अभिलेख एवं बिल तैयार किए गए। काउंटरफीट दवाओं का अवैध क्रय-विक्रय किया गया। मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।