दवा कंपनियों के खिलाफ तीन शिकायतें हाई कोर्ट ने की कैंसिल

शिमला (हिमाचल प्रदेश)। दवा कंपनियों के खिलाफ तीन शिकायतें हाई कोर्ट ने कैंसिल कर दी हैं। ये शिकायतें सीडीएससीओ ने दर्ज करवाई थी। इनमें VIP Pharmaceuticals द्वारा बनाई दवा से जुड़ी शिकायत रद्द की है।

यह है मामला

फार्मास्युटिकल सेक्टर पर दूरगामी असर डालने वाला एक अहम फैसला आया है। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने दवा कंपनियों के खिलाफ तीन शिकायतें रद्द कर दी हैं। दायर याचिकाओं को मंज़ूरी देते हुए समन जारी करने के आदेश रद्द कर दिए। इनमें आरोपी व्यक्तियों को बरी कर दिया। कुछ दवा के सैंपल को अमानक करार दिया गया था। इस पर क्षेत्रीय रेगुलेटरी अधिकारियों ने रिपोर्टों के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू की थी।

जांच के दौरान, स्क्चस् बायोटेक के लेवेतिरासेटम इंजेक्शन और VIP फार्मास्यूटिकल्स के कैप्सूल समेत कई दवाओं के सैंपल ज़ब्त किए। उन्हें चंडीगढ़ की रीजनल ड्रग्स टेस्टिंग लैबोरेटरी भेजा गया। बाद में सरकारी एनालिस्ट ने इन सैंपलों को घटिया क्वालिटी का बताया। इसके बाद सेंट्रल रेगुलेटरी बॉडी ने ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया से कानूनी कार्रवाई की मंज़ूरी ली। रीजनल कोर्ट में शिकायतें दर्ज कराईं। हाई कोर्ट के फ़ैसले का एक मुख्य आधार यह था कि केंद्रीय रेगुलेटरी अधिकारियों के पास कार्यकारी अधिकार क्षेत्र नहीं था।

कोर्ट ने साफ़ किया कि कानूनी ढांचे के तहत, चैप्टर IV के तहत कार्यकारी शक्तियां केवल ड्रग इंस्पेक्टरों के पास होती हैं। कोर्ट ने माना कि केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा चैप्टर III के तहत शुरू की गई कानूनी कार्यवाही बिना किसी कानूनी अधिकार क्षेत्र के थी। कोर्ट ने कंपनियों के प्रमुखों पर विकेरियस लायबिलिटी लागू करने के यांत्रिक तरीके की कड़ी आलोचना की। सिर्फ़ पार्टनर या डायरेक्टर का पद होना ही आपराधिक जि़म्मेदारी तय करने के लिए काफ़ी नहीं है। मुक़दमा चलाने के लिए, शिकायत में साफ़ और खास बातें होनी चाहिए। इसलिए वे दंडात्मक कानूनों के कड़े नियमों पर खरी नहीं उतरीं।

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