गोरखपुर (उप्र)। नशीली दवाओं के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ किया है। खोखर टोला क्षेत्र में महीनों से बंद पड़ी दवा दुकान का पर्दाफाश किया है। इस दुकान के नाम पर नशीली दवाओं की सप्लाई की जा रही थी।
विभाग ने एनए फार्मा पर छापा मारा तो शटर बंद मिला। लोगों ने बताया कि दुकान कई महीनों से नहीं खुली। इसके बाद टीम ने दुकान मालिक से संपर्क किया। मालिक के अनुसार आनलाइन किराया मिलता रहा, इसलिए दुकान बंद होने के बारे में जानकारी नहीं की।
यह है मामला
ड्रग विभाग को नशीली दवाओं की सप्लाई की सूचना मिली थी। जांच में सामने आया कि बंद पड़े शटर के पीछे कफ सीरप का अवैध कारोबार चल रहा है। इन दवाओं का नशे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
दुकान बंद होने के बावजूद ट्रामाडोल और कफ सीरप की पर्याप्त उपलब्धता बनी है। यह दवाओं की एनए फार्मा से अवैध तरीके से आपूर्ति की जा रही थी। ड्रग इंस्पेक्टर अरविंद कुमार ने बताया कि दुकान संचालक बिहार का निवासी है। वह लंबे समय से गोरखपुर से बाहर है। उसने लखनऊ और दिल्ली से नशीली दवाओं की बड़ी खेप मंगवाई थी। बायो हब लाइफ साइंसेज लखनऊ से करीब 20 हजार ट्रामाडोल टैबलेट और चार हजार शीशी कोडीन युक्त कफ सीरप खरीदा था।
आशंका है कि इन दवाओं की अवैध आपूर्ति फुटकर बाजार में की जा रही थी। टीम ने दुकान संचालक इरफान से संपर्क करने का प्रयास किया। उसके दोनों मोबाइल नंबर बंद मिले। विभाग ने दोनों नंबरों और ईमेल पर नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर दुकान संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। उसके नेटवर्क की भी जांच की जाएगी।
लखनऊ में हुई कार्रवाई के दौरान ही यह सूचना मिली थी कि बायो हब लाइफ साइंसेज से एनए फार्मा ने नशीली दवाओं की बड़ी खेप मंगाई थी। विभाग इस मामले को एक बड़े नेटवर्क से जोडक़र देख रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री के पीछे संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है।










