नई दिल्ली। भारतीय फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री को अमेरिका में तत्काल टैरिफ बढ़ोतरी से राहत मिल गई है। फार्मा इंडस्ट्री को यह राहत अमेरिका में किफायती हेल्थकेयर उपलब्ध कराने में जेनेरिक दवाओं की अहमियत के चलते मिली है।

यह है मामला

रूस से तेल खरीदने पर ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामान पर 25 पर्सेंट एडिशनल टैरिफ लगा दिया था। इससे ओवरऑल टैरिफ 50 पर्सेंट पहुंच गया है। इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस के सेक्रेटरी जनरल सुदर्शन जैन के अनुसार, भारतीय फार्मा को टैरिफ इंफोर्समेंट से बाहर रखा गया है। अमेरिका में अफॉर्डेबल हेल्थकेयर मेंटेन करने के लिए जेनेरिक मेडिकेशंस खास हैं। जेनेरिक दवाएं कम प्रॉफिट मार्जिन्स पर ऑपरेट करते हैं। अमेरिका में मरीजों के इलाज के लिए जेनेरिक दवाओं की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।

अमेरिका के फार्मास्युटिकल इंपोर्ट्स में भारत की हिस्सेदारी करीब 6 फीसदी है। यह बताता है कि अमेरिकी मेडिकेयर सिस्टम की भारत पर बड़ी निर्भरता है। 50 पर्सेंट टैरिफ के बाद इंडियन फार्मा एक्सपोर्टर्स ने अपने शिपमेंट्स को ऑस्ट्रेलिया रीलोकेट करना शुरू कर दिया था।

इसके बाद, अमेरिका ने इंडियन फार्मा को 50 पर्सेंट टैरिफ से बाहर कर दिया। अमेरिका अपनी फार्मा सप्लाई के लिए भारत पर कहीं ज्यादा निर्भर है। अमेरिका के करीब आधे जेनेरिक मेडिकेशंस भारत से आ रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि फार्मा पर तात्कालिक ज्यादा टैरिफ की संभावना कम ही है। फार्मा टैरिफ रिवर्स नहीं होते हैं तो कंपनियों को अपने यूएस पोर्टफोलियो को घटाना पड़ सकता है।