पटना (बिहार)। प्रतिबंधित नशीली दवा के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। औषधि नियंत्रक प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई में दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। इनसे 76 हजार से अधिक नशे के इंजेक्शन व टैबलेट जब्त किए हैं। इस मामले में मुख्य सरगना फरार हो गया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मंटू कुमार और विकास के रूप में हुई है। ये ऑटो में प्रतिबंधित इंजेक्शन रखकर ग्राहकों का इंतजार कर रहे थे।

पुलिस ने मौके से इन्हें दबोच लिया। जानकारी के आधार पर पुलिस ने मरचा मिर्ची रोड स्थित एक ट्रांसपोर्ट गोदाम में छापेमारी की। यहां से करीब 70 हजार से अधिक इंजेक्शन और अन्य प्रतिबंधित दवाएं बरामद की गईं। कुल बरामद दवाओं की कीमत 80 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। औषधि नियंत्रक प्रशासन का दावा है कि पटना में पहली बार नशे के 76 हजार इंजेक्शन पकड़े गए हैं। जब्त दवाओं में लॉजेस्टिक, साइलेंट, टेलजेस्टिक, रैनकुट, जेपीन और एविल जैसे इंजेक्शन शामिल हैं। इनका दुरुपयोग नशे के लिए किया जा रहा था।

इस कार्रवाई की निगरानी सहायक औषधि नियंत्रक चुनेंद्र महतो ने की। छापेमारी का नेतृत्व ड्रग इंस्पेक्टर यशवंत झा ने किया। इस पूरे रैकेट का संचालन रवि कुमार और ब्रिजेश कुमार कर रहे थे। वे मौके से फरार हो गए। उनकी तलाश में छापेमारी जारी है।

जांच में सामने आया है कि प्रतिबंधित दवाएं पार्सल के माध्यम से दूसरे राज्यों से मंगाई जा रही थी। ट्रांसपोर्ट गोदाम में स्टोर कर स्थानीय स्तर पर सप्लाई की जाती थीं। पुलिस अब आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। जल्द ही फरार सरगनाओं को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।