179 देशों की मौजूदगी में स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने स्वीकारा: भारत में 10 लाख लोगों की मौत का कारण तंबाकू

भारत पहली बार तंबाकू नियंत्रण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की संधि फ्रेमवर्क कनवेंशन ऑन टोबैको कंट्रोल (एफसीटीसी) सम्मेलन का मेजबान 

नई दिल्ली: तंबाकू नियंत्रण पर हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कॉप-7 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि तंबाकू के कारण बड़ी संख्या में होने वाली मौतों को रोकने के लिए हमें हर हाल में बच्चों और किशोरों के बीच इसका इस्तेमाल रोकने के कड़े प्रयास करने होंगे, क्योंकि भारत में हर साल लगभग 10 लाख लोग तंबाकू से होने वाली बीमारियों के कारण मरते हैं। 7 नवंबर से शुरू हुआ यह सम्मेलन 6 दिनों तक चलेगा, जिसमें पाकिस्तान को छोडक़र विश्व स्वास्थ्य संगठन के सभी 179 देश भाग ले रहे हैं।
श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेना इस छह दिवसीय सम्मेलन के मुख्य अतिथि हैं। भारत पहली बार तंबाकृ नियंत्रण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की संधि फ्रेमवर्क कनवेंशन ऑन टोबैको कंट्रोल (एफसीटीसी) के सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। नड्डा ने कहा, ‘भारत में गुटखा और निकोटीन युक्त पान मसाला के निर्माण और बिक्री पर पूूरी तरह प्रतिबंध है।
इसके अलावा हमने इस साल अप्रैल से तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर 85 फीसदी हिस्से में सचित्र चेतावनी छापने का नियम लागू किया है। किशोर न्याय कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के लोगों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर सात साल जेल और एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया है। इसके अलावा फिल्मों में जागरूकता के वीडियो दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।’

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने फिल्म और टीवी में तंबाकू उत्पादों को बढ़ावा देने के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि भारत इस दिशा में सबसे पहले प्रयास करने वाले देशों में है। सम्मेलन में मौजूद दुनियाभर के प्रतिनिधि भारत के प्रयासों से खुश दिखे। तंबाकू विरोधी अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहे टाटा कैंसर अस्पताल के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. पंकज चतुर्वेदी कहते हैं, ‘भारत अकेला ऐसा देश है, जिसने चबाने वाले तंबाकू को प्रतिबंधित किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का अहम योगदान है। कई राज्यों की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को न्यायालय ने सही ठहराया। भारत दुनिया का अकेला देश है, जिसने नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बेचने को गैर जमानती अपराध बनाया है।