दवा कंपनियों की नई व्यवस्था : हेल्पलाइन नंबर से पता चलेगी दवा की असलियत

झारखंड। नामी दवा कंपनियों ने नकली दवा पर रोक के लिए नई व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत सीरप के लेबल, टेबलेट, कैप्सूल के स्ट्रिप पर संबंधित कंपनी का कोड और कंपनी का हेल्पलाइन नंबर अंकित होने लगा है। इस हेल्पलाइन से रैपर अथवा शीशी पर दर्ज हेल्पलाइन नंबर पर लोग एसएमएस कर संबंधित दवा की असलियत जान सकेंगे। इससे मरीज और उनके परिजन ठगी से बचेंगे और मरीज की जान से भी खिलवाड़ नहीं हो पाएगा। अगर किसी दवा पर शक हो तो उसे संबंधित दवा के रैपर स्ट्रिप पर दिए हेल्पलाइन नंबर पर एसएमएस करना होगा। कंपनी मोबाइल पर जानकारी भेजेगी कि वह दवा असली है या नकली। झारखंड के स्वास्थ्य सचिव सुधीर त्रिपाठी का कहना कि सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) के लिए यह जरूरी है कि ड्रग मैन्युफैक्चरर्स से रिटेल मार्केट और मरीज के बीच एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जाए कि रोगी खुद दवाइयों की असली-नकली की पहचान कर पाएं। इस क्रम में बार कोडिंग और ट्रेस एंड ट्रैक टेक्नोलॉजी उसे इस काम में मदद करेगा। केंद्रीय हेल्थ मिनिस्ट्री में यह प्रपोजल जा चुका है, जिसे जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया द्वारा दवाइयों की पहचान के लिए दवा निर्माता कंपनियों को बार कोड के साथ 10 से 16 अंक लिखने का निर्देश दिया गया है। एसएमएस से दवाई की वास्तविक कीमत भी जान सकेंगे।