योगीजी अब तो देख लो… अस्पताल में जरूरी सस्ती दवाएं भी नहीं

नोएडा: ऑक्सीजन की कमी से गोरखपुर में 60 से ज्यादा बच्चों की मौत को अभी सप्ताह भी ठीक से नहीं बीता कि लखनऊ के अस्पतालों में दवाओं की किल्लत होने की बात सामने आ रही है। हालांकि चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह का दावा है कि सरकारी अस्पतालों में दवाएं पूरी मात्रा में हैं लेकिन हकीकत यह है कि केजीएमयू समेत राजधानी के सभी सरकारी अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं समेत सामान्य दवाएं मरीजों को नहीं मिल रही। मीडिया जब अस्पतालों में पहुंचा तो मरीज दवाओं के लिए भटकते दिखे। मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर से महंगी दवा खरीदते पाया गया।

बलरामपुर अस्पताल के दंत रोग विभाग की ओपीडी में फैजुल्लागंज निवासी प्रीति की पर्ची पर डॉक्टर ने कई दवाएं लिखीं। एक एंटीबायोटिक दवा पर्चे के पीछे भी लिखी और कहा कि बाजार से खरीद लेना। प्रीति ने अस्पताल के मेन गेट के सामने एक मेडिकल स्टोर से 241 रुपये की दवा खरीदी। इसी तरह सिर दर्द की समस्या लेकर न्यूरॉलजी विभाग की ओपीडी में पहुंची रुखसाना को भी 385 रुपये की दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ी।

बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. राजीव लोचन अस्पताल में दवाओं की कमी तो नहीं स्वीकारते लेकिन ओपीडी में दवा मैनेजमेंट में दिक्कत जरूर मानते हैं। हालत यह है कि राजधानी के सभी आठ बाल महिला चिकित्सालयों एवं प्रसूति गृह के अलावा पीएचसी और सीएचसी में गर्भवती महिलाओं को जरूरी दवाएं भी नहीं मिल रही हैं। यहां तक कि ब्रूफिन, प्लेसेंट्रेक्स इंजेक्शन, बोट्रोक्लॉट इंजेक्शन समेत इम्यूनोसिन समेत कई सामान्य और जरूरी दवाएं इन सेंटरों में नहीं हैं।

केजीएमयू में दर्द, ड्रेसिंग, ऐंटीबायॉटिक, रुई, सीरिंज, कीमोथेरेपी की दवा, सूचर (टांके लगाने वाला धागा), नेबोलाइजर, मास्क समेत कई महत्वपूर्ण दवाएं और सर्जिकल उपकरणों की कमी है। संस्थान के मुख्य दवा स्टोर के फार्मासिस्ट के मुताबिक, कंपनी से दवा की मांग की गई है। केजीएमयू में लिस्टेड 60 प्रतिशत दवाएं आ चुकी हैं जबकि 40 प्रतिशत दवाएं अब भी नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग में सीएमएसडी के निदेशक डॉ. रुकुम ने कहा कि दवाओं की खरीद ऑनलाइन है। अस्पताल अपने स्तर से दवा खरीद सकते हैं। कई अस्पताल दवा खरीदने का ऑर्डर तो कर देते हैं, लेकिन रिसीव नहीं करते। ऐसी कई शिकायतें मिली हैं। व्यवस्था जल्द दुरुस्त होगी।