हस्‍त निर्मित दवा गरीबों के लिए बन रही संजीवनी, मेले में लगे दवा काउंटर पर बीएयू की नजर

भागलपुर। हस्त निर्मित पेड़ पौधों से गुणवत्ता युक्त दवा गरीबों की संजीवनी बन रही है। उत्तर प्रदेश सरकार के खादी एवं ग्रामोद्योग द्वारा प्रमाणित बालाजी ग्राम उद्योग सेवा आश्रम लोकल फौर वोकल की तर्ज पर जीवन रक्षक आयुर्वेदिक दवा बना रही है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के किसान मेला में काउंटर लगाया गया है। जिसके माध्यम से जड़ी बूटियों से होने वाले लाभ का प्रचार प्रसार किया जा रहा है ।इसके साथ 17 प्रकार की आयुर्वेदिक दवा कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही है।

प्रसार शिक्षा के सह निदेशक डॉ आरएन सिंह कहते हैं कि इस प्रकार के काउंटर पर बीएयू की खास नजर है। ऐसे तर्ज पर ही विश्वविद्यालय भी आयुर्वेदिक दवा बनाने का शुभारंभ करना चाहता है जिससे स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर मिलेगा, जड़ी बूटी वाली पौधों का विकास होगा और सस्ती और गुणकारी दवा से किसान स्वस्थ भी बनेंगे। विश्वविद्यालय के अधिकारी मेले में लगे इन काउंटरों का गंभीरता से अध्ययन कर रहे हैं ।इसके बाद इस पर ठोस योजना बनाई जाएगी। बताया गया कि पिछले वर्ष भी काउंटर लगाया गया था उसके बाद भागलपुर सहित कई जिला के किसान परिवार ने दवा मंगवाई और उसका लाभ लिया।

मेले में मिले रिस्पांस से उत्साहित कंपनी ने फिर किसान मेला में अपना काउंटर लगाया है। दरअसल 13 वैद्य की टीम आयुर्वेद के चरक संहिता और स्वानुभूति के सिद्धांतों पर आधारित 17 प्रकार की दवा का निर्माण करती है। फिर लखनऊ से टेस्टिंग कराया जाता है ।उसके बाद प्रचार-प्रसार के माध्यम से पूरे देश में होम डिलीवरी की व्यवस्था है ।ऐसे हर राज्य के बड़े शहरों में खादी ग्राम उद्योग के माध्यम से दवा उपलब्ध कराया जाता है।

दवा च्यवनप्राश की तरह पाक और पाउडर के रूप में उपलब्ध है। कोरोना के लिए इम्यूनिटी बढ़ाने वाली बादाम पाक और अश्वगंधा पाक इसके साथ ही डायबिटीज के लिए मधुमेह चूर्ण , मृदुला नारी योग, गैसान्तक अवलेह आदि प्रमुख दवा है। कंपनी के मनोज अवस्थी कहते हैं कि बड़ी कंपनियों की तरह पैकेजिंग और मशीन के उपयोग से टैबलेट आदि का निर्माण नहीं किया जा रहा है जिसके कारण अन्य कंपनियों की अपेक्षा 25 फीसद तक कीमत कम है।

इतना ही नहीं यदि निहायत गरीब हो तो उनके लिए यथासंभव डिस्काउंट पर भी उन्हें दवा दी जाती है ताकि गरीब का जीवन स्वस्थ रह सके। इसके साथ ही जड़ी बूटियों की जानकारी दी जाती है ताकि घर में भी दवा के रूप में स्वयं निर्माण कर उसका गरीब उपयोग कर सके।