ये मशीन बताएगी टीबी से ग्रसित मरीजों के उपचार में कितनी कारगर है दवा, कुछ मिनट में लगेगा पता

फरीदकोट। किसी भी प्रकार के टीबी का पता अब मात्र 90 मिनट में चल सकेगा। टीबी से ग्रसित व्यक्ति को उपचार के लिए जो दवा दी जा रही है वह उक्त पीड़ित के ठीक होने में कितनी कारगर है, यह भी मशीन बताएगी। इससे बीमारी का पता करने और उपचार अवधि घटेगी जिससे पीड़ित को जल्द से जल्द सेहतमंद बनाया जा सकेगा। यह संभव हो पाया है, फरीदकोट जिले में सेहत विभाग द्वारा सिविल अस्पताल के टीबी केन्द्र में अमेरिका निर्मित काटेज बेस्ट न्यूक्लीनियन एसिड एंप्लीफिकेशन टेस्टिग (सीबीएनएएटी) मशीन को लैब स्थापित किए जाने से।

केंद्र के डाक्टर रोमाणा के अनुसार सीबीएनएएटी जांच के लिए किसी भी व्यक्ति का खून व पेशाब को छोड़कर दूसरे सैंपल जांच के लिए लगाए सकते है। 90 मिनट में जांच रिपोर्ट आ जाती है, उसके बाद उसका उपचार शुरू किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अब तक यह पता करने में मुश्किल होती थी कि टीबी ग्रसित व्यक्ति को कौन सी दवा काम कर रही है और कौन सी नहीं है। यह पता करने में काफी समय लग जाता था, परंतु इस मशीन में व्यक्ति के लगाए गए सैंपल से ही पता चल जाता है, पीड़ित को कौन सी दवा काम करेगी और कौन नहीं।

सिविल अस्पताल फरीदकोट के एसएमओ डाक्टर चंद्रशेखर कक्कड़ ने बताया कि अब तक टीबी के सैंपलों की जांच गुरु गोबिद सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल के लैब से करवाई जाती थी, जिसमें एक सैंपल की रिपोर्ट आने में कई बार सप्ताह भर का समय लग जाता था। अब मरीजों को यहीं पर ही 90 मिनट में जांच रिपोर्ट मिल जाती है। उन्होंने बताया कि 25 लाख की लागत से अमेरिका निर्मित यह मशीन विभाग द्वारा लगाई गई है, इससे निश्चित रूप से किसी भी प्रकार के टीबी का पता लगाने के साथ ही उसके उपचार में तेजी आएगी। इनसेट

छह केंद्रों पर 743 टीबी मरीजों का चल रहा उपचार

फरीदकोट जिले में छह स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी का उपचार किया जा रहा है। इन केंद्रों पर 743 पीड़ितों का उपचार चल रहा है। सरकार की ओर से टीबी ग्रसित लोगों का उपचार निशुल्क किया जाता है, बशर्ते जरूरत है कि पीड़ित डाक्टर द्वारा दी जा रही दवाओं का नियमित रूप से बिना किसी अवरोध के प्रयोग करें। प्रत्येक वर्ष दो प्रतिशत टीबी रोगियों की मौत हो जाती है।