हर तीसरा सैंपल फेल

म. प्र. / धार

नए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के बाद से 2015 तक शहर में 2900 से ज्यादा सैंपल लिए गए हैं। यानी हर दिन औसत करीब दो सैंपल लिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से हर तीसरा सैंपल फेल हुआ है। जांच से गलत खाद्य पदार्थ बेचने वालों की संख्या में कमी आई है। यह खुलासा खाद्य औषधि विभाग की रिपोर्ट में हुआ है। नया अधिनियम लागू होने के बाद से ही विभाग द्वारा लोक स्वास्थ्य की दृष्टि से खाने-पीने की चीजों के सैंपल लिए जा रहे हैं। विभाग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक 5 अगस्त 2011 से 31 दिसंबर 2015 के बीच करीब 1600 दिनों में 2905 सैंपल लिए गए। यानी लगभग रोज दो सैंपल। इन में से कुल 862 को भोपाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला ने फेल घोषित किया है, यानी लगभग हर तीसरा सैंपल फेल हुआ है।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि विभाग द्वारा लगातार गलत तरीके से खाद्य पदार्थ बेचने वाले लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। इससे लोगों में भी जागरूकता बढ़ी है और शिकायतें भी ज्यादा मिलने लगी हैं। डर से गलत काम करने वाले कई लोग सुधार भी ला चुके हैं। विभाग इसी तरह अपनी कार्रवाई जारी रखेगा।
926 में से 212 सैंपल फेल – विभाग द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 में कुल 926 सैंपल लिए गए। इनमें से कुल 212 सैंपल फेल हुए हैं। इनमें से 161 मामले एडीएम कोर्ट में पेश किए गए। इन पर 45 लाख 25 हजार का जुर्माना लगाया गया है।
एडीएम कोर्ट में पेश किए गए 553 प्रकरणों में से 467 का निराकरण किया गया। इन मामलों में दोषी व्यापारियों पर 1 करोड़ 32 लाख 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। इसमें से अधिकांश राशि विभाग के खाते में जमा हो चुकी है। वहीं न्यायालय में कुल 143 प्रकरण दायर किए गए हैं, लेकिन अब तक इन पर फैसला नहीं हो पाया है।
192 सैंपल असुरक्षित -इन सैंपलों में से 192 ऐसे थे जिन्हें लैब ने असुरक्षित घोषित किया है, यानी इनके प्रयोग से मानव स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है। वहीं शेष 670 सैंपल मिथ्याछाप व अवमानक स्तर के पाए गए। असुरक्षित सैंपलों में
प्रकरण दर्ज कर जिला न्यायालय में पेश किया गया।