सिविल अस्पताल में HIV पॉजीटिव का हंगामा, हाथ में सिरिंज लेकर नर्स-डॉक्टरों के पीछे दौड़ा

सुरक्षा कर्मचारियों ने युवक को काफी मशक्कत के बाद पकड़कर लिटाया। डॉक्टरों ने उसे समझाया तो वह रोने लगा और आपबीती सुनाई। वह आश्वासन के बाद कुछ शांत हुआ।

पानीपत। पानीपत सिविल अस्पताल में उस समय हंगामा हो गया जब एक युवक सिरिंज लेकर नर्स और डॉक्टरों के पीछे दौड़ता हुआ नजर आया। बताया जा रहा हैं कि वह युवक HIV संक्रमित था और अपने खून की संक्रमित सुई लेकर स्टाफ नर्सों के पीछे दौड़ पड़ा। युवक शहर के नूरवाला क्षेत्र का है। वह मानसिक रूप से परेशान था क्योंकि उसके परिवार ने HIV पॉजीटिव होने के बाद उसे दुत्कार दिया था। युवक ने डॉक्टर को भी सिरिंज मारने का प्रयास किया। सुरक्षा कर्मचारियों ने युवक को काफी मशक्कत के बाद पकड़कर लिटाया। डॉक्टरों ने उसे समझाया तो वह रोने लगा और आपबीती सुनाई। वह आश्वासन के बाद कुछ शांत हुआ।

दरअसल, नूरवाला का 22 साल का युवक चिकन कॉर्नर चलाता था। उसके पिता की तीन साल पहले मौत हो गई थी। डेढ़ साल पहले युवक की तबीयत बिगड़ी तो उसने सिविल अस्पताल में अपनी जांच कराई। वह इसमें HIV पॉजिटिव पाया गया। उसने खुद कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज से अपना 6 माह तक इलाज कराया। उसकी मां ने दूसरी शादी कर ली। अब उसका सौतेला पिता उसके साथ मारपीट करने लगा। माता-पिता ने उसे घर से निकालकर संपत्ति से बेदखल कर दिया।

युवक फुटपाथ पर सोकर अपना जीवन व्यतीत करने लगा। उसको समाज की उपेक्षा का सामना करना पड़ा। युवक उसको एड्स रोगी बोलकर चिढ़ाने लगे। उसको इसी झगड़े में चार माह जेल में भी रहना पड़ा। अब वह एक माह पहले बाहर आया था। बुधवार को उसके सौतेले पिता ने उसकी डंडों से पिटाई कर दी। युवक रोते हुए इलाज कराने नागरिक अस्पताल में पहुंचा।

यहां कर्मचारियों ने उसे बेड पर लेटा दिया। वो समाज की उपेक्षा पर चिल्ला चिल्लाकर रो रहा था। उसने मिनी ऑपरेशन थिएटर में जाकर सिरिंज उठाई और अपनी बाजू में मारी। फिर इस सिरिंज को लेकर वो स्टाफ नर्सों व कर्मचारियों के पीछे दौड़ा। स्टाफ नर्स कमरे में घुस गई कर्मचारी बर्न वार्ड की ओर भाग गए। युवक ने यहां जमकर हुडदंग मचाया। सुरक्षाकर्मियों ने उसको किसी तरह से काबू किया।

युवक की सारी स्थिति समझने के बाद इमरजेंसी मेडिसिन फिजीशियन एवं इमरजेंसी वार्ड प्रभारी डॉ. सुखदीप कौर ने कहा कि समाज से डॉक्टरों की ओर से ये ही अपील है कि वो ऐसे रोगियों की उपेक्षा न करें। ये भी हमारे समाज का हिस्सा है।

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