कैंसर की दवा के नाम पर बेच रहे जहर, गिरोह से जुड़े 2 और लोग दबोचेे

नई दिल्ली। कैंसर की कीमोथैरेपी में इस्तेमाल होने वाली नकली दवा के काले धंधे से जुड़े गिरोह के दो और आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। क्राइम ब्रांच न दिल्ली के न्यू मोती नगर निवासी रोहित बिष्ट (36) और गुडग़ांव सेक्टर-52 वजीराबाद के जितेंद्र (33) को दबोचा है। ये दोनों आरोपी कैंसर की नकली दवा और खाली शीशियां सप्लाई करने का काम करते थे। इनकी गिरफ्तारी पहले पकड़े जा चुके आरोपियों से पूछताछ के बाद की गई है।

आरोपियों के फोन से मिली जानकारी

आरोपी नीरज चौहान की चैटिंग पढऩे पर पुलिस को रोहित और जितेंद्र की जानकारी मिली। पूछताछ में नीरज ने इन दोनों के नकली दवा सप्लाई करने और खाली शीशियां उपलब्ध कराने की बात कबूली। इसके बाद रोहित और जितेंद्र को दबोचाा गया। पुलिस गिरोह से जुड़े सभी लोगों की गिरपु्तारी के लिए उनके फोन खंगाल रही है। एसएमएस और वट्सऐप चैटिंग के जरिए नकली दवा सप्लाई करने की चैन का पता लगाने की कोशिश हो रही है।

बागपत का नीरज चौहान रैकेट का मुख्य सप्लायर

कैंसर

पुलिस के अनुसार बागपत का नीरज चौहान गैंग का मुख्य सप्लायर था। इसने मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन का कोर्स किया हुआ है। वह दिल्ली और गुडग़ांव के प्रसिद्ध अस्पतालों में काम कर चुका है। इसके बाद ये नकली दवा गैंग के मास्टरमाइंड विफिल जैन के लिए काम करने लगा। नीरज की मेडिकल टूरिज्म कंपनी भी है। इसके टारगेट पर विदेश से भारत में कैंसर का इलाज कराने आने वाले मरीज रहते थे। ये उन्हें नकली इंजेक्शन देता था और दोबारा इस्तेमाल करने के लिए शीशी वापस ले लेता था।

दसवीं फेल है मास्टरमाइंड

हैरानी की बात ये है कि बीटेक और फार्मासिस्ट की डिग्री वाले इस रैकेट का मास्टरमाइंड विफिल जैन दसवीं फेल है। बताया गया है कि वह सीलमपुर में एक कैमिस्ट के यहां स्टोर बॉय था। क्राइम ब्रांच ने विफिल और दिल्ली के एक नामी कैंसर अस्पताल के दो कर्मचारियों समेत सात को अरेस्ट किया था। अब तक कुल 12 आरोपी अरेस्ट हो चुके हैं।

 

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