अंबाला की फार्मा कंपनी का सामने आया गडबड़झाला

अम्बाला। अम्बाला की एक औषधि निर्माता कंपनी ने हिमाचल सरकार की मांग पर डाइसाक्लोमिन 10 एमजी को सप्लाई तो कर दी लेकिन विवरण में ‘ईच टेबलेट कन्टेन डेक्समिथासोंन 2 एमजी’ लिख डाला।

मामला सोशल मीडिया पर आते ही हरियाणा के राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. एनके आहूजा ने क्षेत्र के एसडीसीओ रिप्पन मेहता को तुरंत जांच करने को कहा। जब फर्म के रिकार्ड को खंगाला गया तो पाया कि हिमाचल सरकार ने डाइसाक्लोमिन की मांग की थी। निर्माता ने डाइसाइक्लोमिन 10 एमजी ही बनाया परन्तु लेबल डिजाइन करने वाले ने गलती से डेकसामिथासोन 2 एमजी लिख दिया। परन्तु लेवल बनाने वाले की गलती को ठीक से जांच न कर पाने वाले स्टाफ व स्वामियों की गलती है। अत: सजा तो मिलनी तय ही है। इस मामले की भनक डीसी, जीआई की केंद्रीय टीम को मिली तो डीसीओ कपूर की टीम ने एक बार फिर से रिप्पन मेहता एलए के साथ मिलकर फैक्ट्री का रिकॉर्ड खंगाला। पूर्व में भी इस दवा निर्माता का रिकॉर्ड ठीक पाया गया था, सो जल्दबाजी में कोई निर्णय लेना गलत साबित होता व विभाग की भी किरकरी होती। अत: सैम्पल रिपोर्ट आने तक कोई भी जल्दबाजी न दिखाते हुए निर्माता के रिकॉर्ड की जांच पर पैनी नजर रखने की नीति अपनाई।

सूत्र बताते हैं कि जांच टीम ने लेबल मिसब्रांडिड मानते हुए पत्तों को अमान्य मानकर परिणाम आने तक अनुपयोगी करार देकर सेवन के लिए वितरण पर रोक लगा दी। टीम के सूत्रों की मानें तो उन्होंने विभाग को लिखा है कि इस निर्माता की इन दोनों उत्पादों की निर्माण अनुमति पर सवालिया निशान लगाते हुए इन दोनों उत्पादों (डाइसाक्लोमिन, डेकसामिथासोन ) की निर्माण अनुमति रदद् कर दी जाए। यह तो जांच लैब की रिपोर्ट पर निर्भर है कि क्या परिणाम आता है ?

इधर, पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन पदाधिकारियों ने बैठक कर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरो द्वारा जेनेरिक नाम से दवा लिखवने के मुद्दे पर चर्चा हुई। बैठक में मौजूद सांसद ने जोर देते है कि सरकारी डॉक्टर दवा का जेनरिक नाम ही लिखें। पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन के महासचिव एवं एआईओसीडी के नॉर्थ जोन के वाइस प्रेसिडेंट सुरेंदर दुग्गल ने कहा कि वह मरीजों को फ्री दवाएं देने के हक में है ताकि मरीजों को मुफ्त में बेहतर स्वास्थ्य लाभ हो सके। लेकिन इसके विपरीत अस्पतालों पर हजारों,करोड़ों रूपए खर्च करने के बाद भीमरीजों को सहुलियत नहीं मिल रही हैै। यूरोप और अन्य देशों में जेनेरिक का मतलब ही कुछ और है। यह दवाएं आम स्टोरो पर मिलती है। आज कई जेनेरिक दवाइयों के रेट ब्रांडेड दवाओं से ज्यादा हैै।

ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया जीएन सिंह के अनुसार, भारत में दो लाख 30 हजार करोड का दवा कारोबार है। जिसमें एक लाख 20 हजार करोड़ की खपत देश में है। जेनेरिक दवा की गुणवता पर कई प्रकार के आरोप लग चुके हैं। कई मेडिसनों की गुणवता शून्य भी साबित हुई है। सरकारी अस्पताल में दवा जिसमे Dexamethasane है पर उपर डाईसाईकलोमाईन लिखा है। क्या यही गुणवता है। सरकार चाहे केंद्र में हो या राज्यों मेें। पहले अपनी स्थिति सुधारे, सुचारू रूप से कार्य करवाए। आज भारत में 8 लाख के करीब कैमिस्ट व्यवसाय करते हैं। मरीजों को देश के कोने-कोने में दवा मरीजो तक पहुंचाते है। करोड़ों लोगों के भविष्य को ध्यान में रखकर सोचे और डॉक्टरों को काम करने दें। गैर सरकारी हस्पतालो के अंदर अपनी कार्यप्रणाली सुधारे। बैठक में जी एस चावला, सुरिन्द्र शर्मा, राजेश महाजन, सतीश कपूर, राकेश जिंदल आदि उपस्थित रहे।