नर्सिंग सेवा को ठेकेदारों को सौंपने पर आमादा है ईएसआईसी

निगम अस्पतालों की नर्सों के महासंघ ने जताया कड़ा ऐतराज

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशों को धत्ता बताते हुए कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) नर्सिंग सेवा को ठेका कंपनियों को सौंपने पर आमादा दिखलाई दे रहा है। इनकी नर्सें अयोग्य होती हैं और यह आशंका जताई गई है कि इनके हाथों मरीजों की जिंदगी सुरक्षित नहीं है। ईएसआई नर्सों के महासंघ ने आउटसोर्सिंग के जरिए नर्सों की भर्ती का यह कहते हुए कड़ा विरोध किया है कि यह बीमित कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।

आल इंडिया ईएसआई नर्सेज फेडरेशन के महासचिव जोधराज बैरवा ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम के महानिदेशक को एक पत्र लिखकर इस पर भारी ऐतराज जताते हुए नर्सों की आउटसोर्सिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि निगम अपने अस्पतालों में नर्सों की भारी कमी को पूरा करने के लिए आउटसोर्सिंग का सहारा ले रहा है।

बैरवा ने ईएसआईसी मुख्यालय के पत्रांक (नंबर ए-12-16-6-2018,ठेका संबंधी)- परीक्षा की तिथि 23 जनवरी, 2018 का हवाला देते हुए लिखा है कि  कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने अपनी 172वीं बैठक में नर्सों की कमी को दूर करने के लिए अस्थाई उपाय के रूप में एकमुश्त मेहनताना के आधार पर ठेके पर नर्सों को रखने का प्रस्ताव कुछ नियमों और शर्तों के साथ स्वीकृति कर लिया है। नर्सों को ठेके पर रखने का फैसला अनुचित है और बीमित कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों के हितों के खिलाफ है। ऐसा होने पर ईएसआई अस्पतालों में उनके स्वास्थ्य सेवा के उत्तरदायित्व का वहन नहीं हो पाएगा।

बैरवा ने पत्र में लिखा है कि 2013 से ही ईएसआई निगम में नर्सों की भारी किल्लत है। एक ओर ईएसआई निगम श्रम सुधार के तहत रोज नए ईएसआई अस्पताल खोल रहा है, वहीं, ठेका कंपनियों की नर्सों से ही इन अस्पतालों में काम चला रहा है। नर्सिंग पेशा एक भरोसे एवं जवाबदेही वाला है। यह आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आता है और ऐसी सेवा की आउटसोर्सिंग करना गंभीर मरीजों एवं श्रमशक्ति के जीवन के साथ खिलवाड़ ही है ।

उन्होंने लिखा है कि यहां यह ध्यान दिलाना भी जरूरी है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय ने बहुत पहले ही यह निर्देश जारी कर दिया था कि केंद्रीय सरकार के अस्पतालों के लिए आउटसोर्सिंग ( ठेका कंपनियों के जरिए भर्ती) के जरिए नर्सों की भर्ती न की जाए। महानिदेशालय ने यह निर्देश अपने पत्रांक 11013-5-2013 के जरिए 22.12.2013, 14.01.2015 एवं 04.08.2016 तिथियों को जारी किया है। डीजीएसएस के रुख से भी जाहिर है कि नर्सिंग सेवा की गुणवत्ता के लिहाज से नर्सों की आउटसोर्सिंग विनाशकारी साबित होती है। ये मरीजों के लिए बेहद खतरनाक हैं। अव्वल तो आउटसोर्सिंग एजेंसी की विश्वसनीयता को जांचना बेहद कठिन है, दूसरे आउटसोर्सिंग गैर मानक कार्यों का ही एक तरीका है ।

हमारे सामने मुद्दा यह है कि ठेकेदार अयोग्य नर्सों की सप्लाई करते हैं, जो मरीजों के लिए खतरनाक है।  इसलिए उन्होंने मांग की है कि बीमित कर्मचारियों और उनके आश्रित मरीजों की देखभाल निगम के नियमित व योग्य नर्सों से ही करावाई जानी चाहिए।

ठेका कंपनियों के जरिए नर्सों की भर्ती की विभिन्न खामियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने अपने पत्र में निगम से बिना कोई देरी किए नर्सों की नियमित भर्ती के लिए अधिसूचना जारी करने का अनुरोध किया है। हालांकि उन्होंने नियमित भर्ती होने तक आउटसोर्सिंग की जगह खुले विज्ञापन के जरिए ठेके पर अनौपचारिक रूप से नर्सों की भर्ती पूरा करने पर हामी भरी है।