दून अस्पताल में दवाओं की सप्लाई रुकी

देहरादून। दून अस्पताल में दवाओं की सप्लाई नहीं हो पा रही है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल में दवा न आने के पीछे की कहानी भी हैरान कर देने वाली है। दरअसल, राज्य सरकार ने हॉस्पिटल को दवा सप्लाई करने वाली कंपनी के लिए शर्त रखी है कि उसका सालाना टर्नओवर कम से कम 70 करोड़ होना चाहिए। इस शर्त को दवा कंपनियां पूरा नहीं कर पा रही हैं और हॉस्पिटल को दवा सप्लाई करने में दिलचस्पी नहीं ले रहीं। ऐसे में पुरानी कंपनियों के कॉन्ट्रेक्ट को ही एक्सटेंशन देकर काम चलाया जा रहा है, लेकिन करीब दो करोड़ की उधारी होने के कारण ये कंपनियां भी दवा सप्लाई करने में आनाकानी कर रही हैं।
राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में दवा सप्लाई का टेंडर देने वाली एजेंसी का सालाना टर्नओवर 70 करोड़ रुपया होना अनिवार्य किया है। उत्तराखंड में काम करने वाली कोई भी दवा एजेंसी इस शर्त को पूरा नहीं करती। बाहरी राज्यों की जो बड़ी एजेंसियां इस शर्त को पूरा करती हैं, वे कुछ लाख की दवा सप्लाई के लिए दून हॉस्पिटल के टेंडर में रुचि नहीं ले रही हैं। मेडिकल कॉलेज की ओर से पिछले कुछ महीनों में कम से कम तीन बार टेंडर नोटिस दिया गया है, लेकिन एक भी कंपनी टेंडर देने के लिए आगे नहीं आई है। ऐसे में फिलहाल पुरानी एजेंसियों के कॉन्ट्रेक्ट को ही रिन्यू करके दवाइयां मंगवाई जा रही हैं।
सरकारी हॉस्पिटल्स में मुफ्त वितरण के लिए केन्द्र सरकार की ओर से 106 दवाइयां अप्रूव्ड हैं। इन सभी दवाइयों के लिए हॉस्पिटल्स की ओर से टेंडर मांगे जाते हैं। कुछ कंपनियां सीधे दवा सप्लाई के लिए टेंडर देती हैं, जबकि कुछ एजेंसियां अलग- अलग कई दवाइयां सप्लाई करने के लिए कॉन्ट्रेक्ट करती हैं। लेकिन, दून हॉस्पिटल में ऐसे कम ही मौके आते हैं जब सभी अप्रूव्ड दवाइयां यहां उपलब्ध रहती हों।
आमतौर पर हॉस्पिटल में 50 से 60 दवाइयां ही उपलब्ध होती हैं। दून हॉस्पिटल की ओर से दवा सप्लाई करने वाली कंपनियों और एजेंसियों को पिछले 10 महीने से पेमेंट नहीं दिया गया है। सूत्रों के अनुसार पिछले साल अप्रैल में अंतिम बार दवाइयों के पेमेंट दी गई थी, तब से अब तक हॉस्पिटल में करीब 2 करोड़ रुपये उधारी चढ़ गई है। शासन से बजट न मिलने के कारण यह उधारी लगातार बढ़ रही है और कंपनियां भी दवा सप्लाई करने में आनाकानी करने लगी हैं। वैसे तो हॉस्पिटल में कई दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन लोगों पर सबसे ज्यादा असर एंटी रैबीज इंजेक्शन न होने का पड़ रहा है। 25 जनवरी से हॉस्पिटल में यह इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है।
बार-बार कहने पर भी कंपनी कन्फर्म नहीं कर रही है कि इंजेक्शन कब तक आयेगा। फिलहाल कंपनी से 12 फरवरी के बाद की डेट दी है  इस बारे में दून हॉस्पिटल के एमएस डॉ. केके टम्टा ने बताया कि 70 करोड़ टर्नओवर की शर्त से परेशानी तो हो ही रही है। उत्तराखंड में कई दवा कंपनियां हैं, जिनसे हम सीधे दवा ले सकते हैं, लेकिन कोई भी कंपनी 70 लाख टर्न ओवर की शर्त पूरी नहीं करती। फिर भी हम लोगों को ज्यादा से ज्यादा दवाइयां उपलब्ध करवा रहे हैं। जन औषधि केन्द्र से भी काफी मदद मिल रही है।