कैंसर की बजाए दवा ले रही जान

नई दिल्ली। कैंसर के इलाज में महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी के फायदे कम और नुकसान ज्यादा सामने आए हैं। एक रिसर्च में बताया गया है कि कैंसर रोग से कम और इसकी दवा से ज्यादा मौतें हो रही हैं। कुछ अस्पतालों में कैंसर की दवाएं ही 50 प्रतिशत मरीजों की जान ले रही हैं। किसी-किसी अस्पताल में तो मरीजों की मौत का आंकड़ा कुछ ज्यादा ही निकला। मिल्टन किंस अस्पताल में फेफड़े के कैंसर से मौत का प्रतिशत 50.9 दर्ज किया गया। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में पांच में से एक मरीज की मौत हो गई जो स्तन कैंसर के इलाज में दर्द निवारक थेरेपी ले रहे थे।

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड और कैंसर रिसर्च यूके ने समूचे इंग्लैंड में फेफड़े के कैंसर के 8.4 प्रतिशत और स्तन कैंसर के 2.4 प्रतिशत मरीजों पर अध्ययन किया जो इलाज के एक माह के अंदर चल बसे थे। रिसर्च में उन मरीजों पर गौर किया गया, जिन्होंने 30 दिन के अंदर-अंदर कीमोथेरेपी ली है। इसमें मरीजों की मौत का कारण कैंसर की बजाए दवाओं का होना पाया गया। स्टडी में स्तन कैंसर से पीडि़त 23 हजार महिलाओं और फेफड़े के कैंसर से जूझने वाले 9634 मरीजों पर गौर किया गया जिन्होंने 2014 में कीमोथेरेपी ली थी। इनमें 1,383 मरीजों की 30 दिन के अंदर मौत हो गई।

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के डॉ. जेम रैशबाश के अनुसार कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी अहम रोल अदा करता है। पिछले चार दशक में अगर कैंसर रोगियों में कुछ सुधार हुआ है तो इसके पीछे कीमोथेरेपी का हाथ है। जिन अस्पतालों में मौत का आंकड़ा ज्यादा मिला है उनसे यह रिपोर्ट साझा की गई है। उन्हें इस पर गंभीरता से विचार करने को कहा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार कीमोथेरेपी शरीर के लिए जहर का काम करता है क्योंकि इसकी किरणें स्वस्थ और कैंसरयुक्त कोशिकाओं में अंतर नहीं कर पातीं। रिसर्च में कीमोथेरेपी का असर उम्रदराज और बिगड़ी सेहत के लोगों में अलग-अलग पाया गया। स्टडी में डॉक्टरों को सलाह दी गई है कि वे इलाज करते वक्त इस बात का खयाल रखें कि फायदा से ज्यादा नुकसान न हो जाए।