जन औषधि योजना की दवाइयां जांच में फेल 

नई दिल्ली। जन औषधि की छह बैच की दवाइयां गुणवत्ता जांच में फेल पाई गई हैं। अब इन्हें वापस मंगाया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार विभाग, भारत के फार्मा पीएसयू ब्यूरो (बीपीपीआई) में वर्तमान में कोई भी पदाधिकारी गुणवत्ता नियंत्रण, नियामक मामलों या दवा खरीद विभागों का नेतृत्व नहीं कर रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जन औषधि केंद्रों में दी जाने वाली दवाइयों की गुणवत्ता जांच की गारंटी कौन लेगा।
फार्मास्यूटिकल्स को नियंत्रित करने वाले रसायनों और उर्वरकों के मंत्रालय ने पहले से ही बीपीपीआई के खिलाफ 14 आरोपों में आंतरिक जांच शुरू की है, जिसमें वित्तीय दुरूपयोग और सरकार के अपने लेखा परीक्षक द्वारा किए गए खरीद के लिए अपने नियमों का उल्लंघन करने को लेकर मुख्य लेखा नियंत्रक से पूछताछ की जा रही है।
बताया गया है कि सरकार के लिए सिरदर्द बन चुकी बीपीपीआई में तीन साल में अब तक तीन सीईओ इस्तीफा दे चुके हैं। आखिरी बार, बिप्लाब चटर्जी नवंबर में अपने इस्तीफे की ओर बढ़ रहे हैं। बीपीपीआई को राज्य के दवा नियंत्रकों द्वारा आयोजित मानक गुणवत्ता परीक्षणों में विफल होने के बाद अकेले कर्नाटक से पिछले महीने दवाइयों के चार बैचों को वापस करना पड़ा था। इसने पुष्टि की कि कर्नाटक और त्रिपुरा राज्यों में पिछले तीन महीनों में छह बैच वापस हुई हैं, जो पिछले साल 12 महीनों में 11 बैच वापस हुई थी।
जनवरी से डीसी 420 (एटोरवास्टैटिन और क्लॉपिडोग्रेल का संयोजन), SUCRALFATE, पैरासिटामोल सिरप, विटामिन सी गोलियाँ, एमोक्सिकलाव सिरप और बाकलोफेन गोलियां हैं जिसके नमूने जांच के दौरान फेल हो गए। जनऔषधि केंद्रों की दवाओं की गुणवत्ता से लेकर पूरे देश में स्टोर मालिक अनियमित स्टॉक की शिकायत करते हैं। नाम नहीं छापने की सूरत में एक रिटेल कारोबारी ने बताया कि लगभग 700 तरह की दवाओं में उन्हें सिर्फ 100 से 150 प्रोडक्ट ही बमुश्किल मिल पाते हैं। दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के जवाब में बीपीपीआई ने अपने बचाव में कहा है कि सही तापमान की स्थिति व अन्य चीजों के साथ दवाओं का भण्डारण करने जैसे परिस्थितियों में चूक हुई है। बीपीपीआई ने कहा है कि परीक्षण प्रयोगशालाओं (एनएबीएल) के लिए राष्ट्रीय मान्यता बोर्ड से गुणवत्ता परीक्षण पास करने के बाद जन औषधि के प्रोडक्ट्स को खुदरा विक्रेताओं को भेजा जाता है। दवा की छमता में कोई भी बदलाव नियंत्रण से परे है। बीपीपीआई के अंतरिम सीईओ बिप्लाब चटर्जी ने कहा,  राज्य दवा नियंत्रकों ने हमें सूचित करने और दवा पर बिलिंग को रोकने के तुरंत बाद दवाइयों को वापस ले लिया गया है ।