डॉक्टर ‘घर’ में, फूड सेफ्टी अधिकारी ‘यात्रा’ पर

  • असली से ज्यादा नकली फूड इंस्पेक्टर हरियाणा में सक्रीय, पुलिस कार्रवाई में सामने आया सच 
रोहतक: डॉक्टरों को ‘घर’ में नियुक्ति देने वाले हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज न जाने फूड सेफ्टी अधिकारियों (एफएसओ) को क्यों ‘घुमा’ रहे हैं। ताजा तबादला सूची देखकर लगता है कि एफएसओ काम से ज्यादा ‘यात्रा’ ही करेंगे। कुल जिलों की संख्या के मुकाबले राज्य में एफएसओ आधे हैं। इस वजह से एक एफएसओ के जिम्मे दो जिलों का कार्यभार है। लेकिन ताजा तबादला सूची पर गौर करें तो एफएसओ काम से ज्यादा यात्रा का ‘भार’ ढोते नजर आएंगे।
इस सब के बीच पलवल में नौ नकली फूड इंस्पेक्टर पुलिस ने पकड़े हैं। चर्चा आम है कि असली कम है और जो हैं वह सरकारी पचड़ों में उलझे रहते हैं। मौसम ‘खाने-पीने’ का है तो हरियाणा में नकली फूड इंस्पेक्टर की भूमिका ‘श्री420’ को बेहद रास आ रही है।  
मुद्दे की बात पर आते हैं, एफएसओ प्रेम सिंह को हिसार के साथ यमुनानगर का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। यमुनानगर और हिसार के बीच की दूरी करीब 200 किलोमीटर है, ऐसे में हिसार बैठे अधिकारी को यदि यमुनानगर में कार्रवाई के लिए जाना पड़े तो उसे 4-5 घंटे का सफर करना पड़ेगा। इसी तरह झज्जर के एफएसओ महाबीर सिंह को मेवात का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया, जो करीब 100 किलोमीटर की दूरी है। इसी तरह अंबाला के एफएसओ के.के. शर्मा अंबाला के साथ करनाल देखेंगे। यह अलग बात है कि उन्हें करनाल देखने के लिए करीब 80 किलोमीटर सफर करना होगा। सिरसा और फतेहाबाद की जिम्मेदारी एफएसओ श्यामलाल को मिली है, लेकिन श्यामलाल फिलहाल निलंबन झेल रहे हैं। बहाल होने पर उन्हें भी कर्तव्य निष्ठा में 68 किलोमीटर का सफर करना होगा।
रही बात जींद के एफएसओ ओमकुमार, फरीदाबाद के पृथ्वी सिंह, कुरुक्षेत्र के राजेंद्र सिंह, रेवाड़ी के एनडी शर्मा, भिवानी के जितेंद्र यादव और सोनीपत के डी.के शर्मा की, तो एकाध को छोड़ कर  तमाम अधिकारी अपने काम को ‘सफर’ नहीं होने देंगे तो औसत 50-60 किलोमीटर सफर जरूर करेंगे।
सवाल ये है कि जब डॉक्टरों की कमी पर बात आती है तो स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज उन्हें घर में नियुक्ति देने का निर्णय लेते हुए तर्क देते हैं कि सफर कम होगा तो काम ज्यादा और बेहतर होगा। फूड सेफ्टी अधिकारियों का कार्य भी जनता को रोग मुक्त, उत्तम गुणवत्ता का खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाना है और एफएसओ भी आधी संख्या में है। दोनों ही का कार्य एक-दूसरे से जुड़ा है, तो सेवा में ‘दूरी’ क्यों।
वैसे हरियाणा में जिला मुख्यालय एवं सीएचसी-पीएचसी में नियुक्त चिकित्सा अधिकारियों को भी फूड सैंपलिंग करने की पॉवर है, लेकिन जब कार्रवाई में देरी और लापरवाही की बात सामने आती है, तो ‘सफर’ करने वाले एफएसओ को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। जैसा कि फतेहाबाद में दूध के सैंपल फेल होने के बाद कार्रवाई में हुई लापरवाही के मामले मेंं देखा गया। यहां स्वास्थ्य मंत्री ने आठ महीने बाद सिविल सर्जन के जवाब पर बिना एफएसओ का पक्ष जाने उन्हें निलंबित कर दिया। जबकि सैंपल डिप्टी सीएमओ ने लिया और संबंधित एफएसओ ने करीब तीन महीने बाद कार्यभार संभाला था।
खैर, गौर करने वाली बात ये कि गर्मी के मौसम में खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट, गुणवत्ताविहीन होने की संभावना बढ़ जाती है, ऐसे में एफएसओ की कमी और लंबी दूरी कहीं स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी न पड़ जाए। यदि सीएमओ, एसएमओ फूड सैंपलिंग में ज्यादा समय देंगे (जैसा कि इन दिनों देखने में आया है) तो अस्पतालों में अव्यवस्था होना लाजिमी है। इन दोनों स्थितियों  से निपटने के लिए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज क्या योजना बनाएंगे, यह देखने वाली बात होगी।