रुपये में सजा, डॉलर($) में ‘मजा’: भ्रूण लिंग जांच का ये कैसा कानून

नई दिल्ली: पहले कानून पढ़े: ‘पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम, 1994, भारत में कन्या भू्रण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए भारत की संसद द्वारा पारित एक संघीय कानून है। इस अधिनियम से प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक ‘पीएनडीटी’ एक्ट 1996, के तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी कराने वाले जोड़े या करने वाले डाक्टर, लैब कर्मी को तीन से पांच साल सजा, 10 से 50 हजार जुर्माने का प्रावधान है।’
भारतीय सविधान में दर्ज इस कानून का देश में बेशक कड़ाई से पालन हो रहा है, लेकिन अमेरिका मुंह चिढ़ा रहा है। ऑनलाईन शॉपिंग वेबसाइट अमेजॉन के मार्फत भारत के किसी भी कौने में आप घर बैठे अमेरिका से भू्रण लिंग जांच किट मंगा सकते हैं। मेडीकेयर ने पड़ताल में पाया कि प्रतिबंध के बीच भारत में लोगों को आकर्षित करने के लिए कीमत में भी भारी खेल है और भारत में पहुंच होने के बावजूद कीमत डॉलर में ही अंकित है। किट का मूल्य मात्र 9.95 डॉलर रखा गया है, लेकिन ऑनलाइन भेजने का खर्च (शिप्पिंग चार्जेज) 199 डॉलर है। यानी 209 डॉलर में बिना किसी भय के भू्रण लिंग जांच का उपकरण हासिल कर सकते हैं। दूसरा पहलू देखें तो भारत में चोरी-छिपे भू्रण लिंग जांच का धंधा करने वाले दलालों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों का खर्च भी 10 से 15 हजार रुपये बैठता है। ऐसे में अमेरिका की जेंडर प्रीडिक्शन किट का भारत बड़ा बाजार बन रहा है। दूसरी तरफ, सरकार देश में ई-फार्मेसी को मंजूरी दे रही है।

कंपनी का दावा: गर्भावस्था के 10 सप्ताह बाद यूरीन (मुत्र) की कुछ बुंदों के जरिए कुल 10 मिनट में पता कर सकते हैं कि गर्भ में लडक़ा है या लडक़ी। किट पर लिखी प्रयोग विधि के मुताबिक, यूरीन की बूंद के किट में मौजूद कैमिकल में मिलने से रंग उभरता है। यदि रंग नीला है तो लडक़ा, गुलाबी है तो लडक़ी। हालांकि अभी किट बनाने वाली कंपनी ने लिंग जांच में सहायक कैमिकल का जिक्र कहीं नहीं किया है। डीएनए किट लिंग जांच भी ऑनलाइन उपलब्ध है इस प्रक्रिया में भी रक्त बूंदे किट के भीतर मौजूद केमिकल के संपर्क में आकर रंग दर्शाती हैं।
सरकारी वेबसाइट पर मौजूद पीसीपीएनडीटी एक्ट 1994 के अध्याय तीन में तो यहां तक कहा गया है कि प्रसूति पूर्व लिंग जांच करने वाला व्यक्ति सुनिश्चित करे कि गर्भवती महिला की आयू 35 वर्ष से अधिक है। गर्भवती महिला के दो या अधिक तात्क्षणिक गर्भपात या गर्भस्थ भू्रण हानि हो चुकी हो। गर्भवती महिला ड्रग्स, विकिरण इन्फेक्शन या कैमिकल्स जैसे किसी पोटेंशियली टेराटोजैनिक एजेंट्स के संपर्क में आई हो आदि। देश में एमटीपी किट केमिस्ट द्वारा बेचना तो दूर भंडारण करना भी संगीन गुनाह की श्रेणी में है।
यह अलग बात है कि काम सारे होते हैं और वह भी सरकार और प्रशासन की नाक के नीचे (जैसा कि आए दिन मीडिया की सुर्खिया होती हैं)। हरियाणा में तो गैर कानूनी तौर पर लिंग जांच करने संबंधी सूचना देने वालों को 1 लाख रुपये सरकारी इनाम और नाम गुप्त रखने का प्रावधान है। इस विज्ञापन से शहर के चौक-चौराहे और सरकारी वाहन अटे पड़े हैं। कभी पूरे देश में बिगड़े लिंगानुपात के लिए कलंकित झज्जर फिर चर्चा में है। पिछले छह महीनों के आंकड़े देखें तो कड़े कानून और प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के बावजूद 15 से 20 फीसदी लड़कियां कम हुई।
एक तस्वीर यह भी: कभी गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी को अमेरिका द्वारा वीजा न दिया गया और अब उसी अमेरिका में खड़े होकर मोदी भारत के विकास का खाका खींचते हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा तालियों के साथ तारीफ करते नहीं थकते। 
सवाल:  दोनों राष्ट्र अध्यक्षों की गर्मजोशी के बीच भारत का पीएनडीटी एक्ट बेअसर साबित हो रहा है। मेडीकेयर की जांच में चौंकाने वाली बात ये भी सामने आई कि चुनिंदा कंपनी ही हैं, जिनको भारत में जेंडर प्रीडिक्शन किट ऑनलाइन बेचने की अनुमति है। मेडीकेयर न्यूज ने जब पड़ताल में ऑनलाइन किट खरीदने की प्रक्रिया शुरू की तो अमेरिका के अलावा भी कई विदेशी कंपनियां किट ऑनलाइन बेच रहीं है, लेकिन उन्हें भारतीय बाजार में अनुमति नहीं है।
हरियाणा में प्रधानमंत्री की भावुक अपील के अंश:  
  • ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: हमें बेटियों को मारने का हक नहीं है, हमारा मंत्र होना चाहिए ‘बेटा बेटी, एक समान’ बेटियों के जीवन की भीख मांगने के लिए एक भिक्षुक के रूप में आया हूं। 
  • हमारी मानसिकता 18वीं सदी की है, हमें खुद को 21वीं सदी का नागरिक कहने का कोई अधिकार नहीं। 
  • बेटे और बेटियों के बीच भेदभाव खत्म होना चाहिए। बेटियां पैदा नहीं होंगी तो बहुएं कहां से लाएंगे।  ऐसे लोग हैं जो पढ़ी लिखी बहुएं चाहते हैं, लेकिन वो अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए तैयार नहीं।