आर्थराइटिस के इलाज में बाधक है धूम्रपान 

नई दिल्ली। जोड़ों के दर्द की बीमारी रुमेटॉयड आर्थराइटिस (गठिया) से पीडि़त लोगों में मोटापे और धूम्रपान के कारण इलाज का असर प्रभावित होता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि सही समय पर इलाज मिलने के बाद भी 46 फीसद महिलाओं और 38 फीसद पुरुषों पर इलाज का उचित असर नहीं पड़ता। महिलाओं में इलाज का असर नहीं दिखने का प्रमुख कारण मोटापा है, जबकि पुरुषों में धूम्रपान के कारण इलाज प्रभावित होता है।
कनाडा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार बढ़ती उम्र और जोड़ों में दर्द बढऩा भी इलाज के असर को प्रभावित करता है। 1,628 वयस्कों पर हुए शोध में यह बात सामने आई। कुछ मरीजों का उपचार मेथोट्रेक्सेट, जबकि अन्य का सिंथेटिक डिजीज मोडिफाइंग एंटिरेमाटिक ड्रग से किया गया था। जांच में सामने आया कि मेथोट्रेक्सेट ना देने से महिलाओं में 28 फीसद, जबकि पुरुषों में 45 फीसद तक उपचार का असर प्रभावित होता है। जीवनशैली में बदलाव करने, वजन घटाने और धूमपान से दूर रहने के साथ ही मेथोट्रेक्सेट का इस्तेमाल करने से आर्थराइटिस का इलाज आसान हो सकता है।