गांजे से बनी दवा करेगी मिर्गी का इलाज 

नई दिल्ली। अमेरिकी स्वास्थ्य नियामकों ने मैरियुआना (गांजा) से बनी पहली दवा को मंजूरी दे दी है। इस कदम को मील का पत्थर माना जा रहा है, जिसके जरिये एक ऐसी दवा पर और ज्यादा शोध हो सकता है जो संघीय कानून के तहत अवैध है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने दो साल और उससे ज्यादा उम्र के मरीजों में मिर्गी के दो दुर्लभ प्रकारों का इलाज करने के लिए एपिडियोलेक्स नाम की दवा को मंजूरी दी है। हालांकि यह पूरी तरह से गांजा नहीं है। स्ट्रॉबेरी-फ्लेवर सिरप गांजे के पौधे में पाए जाने वाले रसायन का एक शुद्ध रूप है और इसके इस्तेमाल से व्यक्ति को उस हद तक नशा नहीं होता। यह अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि क्यों कैनाबीडियोल या सीबीडी कहा जाने वाला घटक, मिर्गी से पीडि़त लोगों के दौरे को कम कर देता है। इससे पहले ब्रिटिश ड्रगमेकर त्रङ्ख फार्मास्यूटिकल ने कई कानूनी बाधाओं को पारकर 500 से ज्यादा बच्चों और व्यस्कों पर इस ड्रग पर स्टडी की थी, जिनके दौरे का मुश्किल से इलाज हो पाता था।
एफडीए के अधिकारियों ने कहा कि पुरानी मिर्गी की दवाओं के साथ मिलाए जाने पर दवाओं ने दौरे को कम  कर दिया। एफडीए प्रमुख स्कॉट गॉटलिब ने कहा कि उनकी एजेंसी ने कई वर्षों तक कैनाबिस से निकले उत्पादों पर शोध का समर्थन किया है। गॉटलिब ने कहा कि यह अप्रुवल इस बात को याद दिलाता है कि गांजे में मौजूद तत्वों का अगर उचित मूल्यांकन हो तो उनके जरिये महत्वपूर्ण चिकित्सीय उपचार हो सकते हैं. एफडीए इससे पहले एचआईवी के रोगियों में वजन घटाने सहित गंभीर बीमारियों के इलाज में गांजे के एक अन्य सिंथेटिक वर्जन को मंजूरी दे दी है। एपिडियोलेक्स अनिवार्य रूप से फार्मसूटिकल-ग्रेड वर्जन सीबीडी ऑयल है, जिसे कुछ माता-पिता पहले से ही मिर्गी वाले बच्चों के इलाज के लिए उपयोग करते हैं। गांजे के पौधे में 100 से अधिक रसायनों में से एक सीबीडी भी है। इसमें टीएचसी नहीं है, जिसके चलते इसका उपयोग करने पर दिमाग पर असर होता है।