नई दिल्ली। सन फार्मा और एल्केम के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई है। नोवो नॉर्डिस्क ने दो अलग-अलग पेटेंट उल्लंघन मामलों में यह रिट दायर की है। नोवो का कहना है कि सन फार्मा और एल्केम लैब सेमाग्लूटाइड का निर्माण और बिक्री कर रही है। जबकि यह उसकी ब्लॉकबस्टर दवा वेगोवी का सक्रिय घटक है। इसके किसी भी व्युत्पन्न उत्पाद के निर्माण या बिक्री से रोकने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इसके चलते मधुमेह और मोटापे की सबसे अधिक मांग वाली दवा को लेकर कानूनी लड़ाई और तेज हो गई है।
यह नई याचिका हाल ही में एक अदालती आदेश के बाद आई है। इसमें डॉ. रेड्डीज़ को नोवो नॉर्डिस्क के पेटेंट की समाप्ति तक घरेलू बिक्री पर रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही सेमाग्लूटाइड के अपने संस्करण का निर्माण और निर्यात जारी रखने की अनुमति दी गई है।
डेनिश दवा निर्माता के सेमाग्लूटाइड उत्पाद दो प्रमुख भारतीय पेटेंटों द्वारा संरक्षित हैं। इनमें सेमाग्लूटाइड की संरचना से संबंधित पेटेंट संख्या 275964 भी शामिल है। इसकी अवधि सितंबर 2024 में समाप्त हो गई है। इससे जेनेरिक विकास का द्वार खुल गया है। पेटेंट संख्या 262697 विशिष्ट फॉर्मूलेशन और वितरण उपकरणों को कवर करता है, जो मार्च 2026 तक वैध है। सन फार्मा ने पहले ही इस श्रेणी में प्रवेश करने की अपनी मंशा का संकेत दिया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने पहले नोवो नॉर्डिस्क को डीआरएल के खिलाफ अंतरिम निषेधाज्ञा देने से इनकार कर दिया था। यह देखते हुए कि भारतीय कंपनी ने शेष पेटेंट की वैधता को एक विश्वसनीय चुनौती दी है। इस मामले पर अब कड़ी नजऱ रखी जा रही है। यह भारत के तेज़ी से बढ़ते मोटापे और मधुमेह की दवा बाज़ार में जेनेरिक दवाओं के प्रवेश के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।










